Love Poetry (page 17)

सस्ती नज़्म

इंजील सहीफ़ा

राज़ी-नामा

इंजील सहीफ़ा

ले-बाई एरिया

इंजील सहीफ़ा

दिसम्बर आ गया है

इंजील सहीफ़ा

अन-छूई कथा

इंजील सहीफ़ा

सीप मुट्ठी में है आफ़ाक़ भी हो सकता है

इंजील सहीफ़ा

मिरा चेहरा भोला ओ माही

इंजील सहीफ़ा

कोई गा दे मीठी लोरी सजन

इंजील सहीफ़ा

फ़ज़ा में रंग से बिखरे हैं चाँदनी हुई है

इंजील सहीफ़ा

टूटा फूटा सही एहसास-ए-अना है मुझ में

इंद्र सरूप श्रीवास्तवा

पानी मिट कर भी रह गया पानी

इंद्र मोहन मेहता कैफ़

मिटती क़द्रों में भी पाबंद-ए-वफ़ा हैं हम लोग

इंद्र मोहन मेहता कैफ़

दिल की राहों से दबे पाँव गुज़रने वाला

इंद्र मोहन मेहता कैफ़

ज़िंदगी आज तेरा लुत्फ़ ओ करम

इन्दिरा वर्मा

ये शफ़क़ चाँद सितारे नहीं अच्छे लगते

इन्दिरा वर्मा

ये कैसी वक़्त ने बदली है करवट

इन्दिरा वर्मा

तुम्हारे बिना सब अधूरे हैं जानाँ

इन्दिरा वर्मा

सिला दिया है मोहब्बत का तुम ने ये कैसा

इन्दिरा वर्मा

रौशनी फूट निकली मिसरों से

इन्दिरा वर्मा

किताब-ए-ज़ीस्त का उनवान बन गए हो तुम

इन्दिरा वर्मा

बहारों के आँचल में ख़ुश-बू छुपी है

इन्दिरा वर्मा

यूँ वफ़ा के सारे निभाओ ग़म कि फ़रेब में भी यक़ीन हो

इन्दिरा वर्मा

ये शफ़क़ चाँद सितारे नहीं अच्छे लगते

इन्दिरा वर्मा

ये मौसम सुरमई है और मैं हूँ

इन्दिरा वर्मा

वो अजीब शख़्स था भीड़ में जो नज़र में ऐसे उतर गया

इन्दिरा वर्मा

उस से मत कहना मिरी बे-सर-ओ-सामानी तक

इन्दिरा वर्मा

तिरे ख़याल का चर्चा तिरे ख़याल की बात

इन्दिरा वर्मा

तमाम फ़िक्र ज़माने की टाल देता है

इन्दिरा वर्मा

शिकस्ता-दिल अँधेरी शब अकेला राहबर क्यूँ हो

इन्दिरा वर्मा

शफ़क़ के रंग निकलने के बाद आई है

इन्दिरा वर्मा