Love Poetry (page 18)

मुझे रंग दे न सुरूर दे मिरे दिल में ख़ुद को उतार दे

इन्दिरा वर्मा

मोहब्बत में आया है तन्हा अभी रंग

इन्दिरा वर्मा

कुछ बला और कुछ सितम ही सही

इन्दिरा वर्मा

काश वो पहली मोहब्बत के ज़माने आते

इन्दिरा वर्मा

कभी मुड़ के फिर इसी राह पर न तो आए तुम न तो आए हम

इन्दिरा वर्मा

हज़ार ख़्वाब लिए जी रही हैं सब आँखें

इन्दिरा वर्मा

दोस्त जब ज़ी-वक़ार होता है

इन्दिरा वर्मा

दिल से अपने ख़ुद-ब-ख़ुद कुछ पूछिए मेरे लिए

इन्दिरा वर्मा

दिल के बेचैन जज़ीरों में उतर जाएगा

इन्दिरा वर्मा

अभी से कैसे कहूँ तुम को बेवफ़ा साहब

इन्दिरा वर्मा

आज फिर चाँद उस ने माँगा है

इन्दिरा वर्मा

सावन की इस रिम-झिम में

इंद्र सराज़ी

रोते हैं जब भी हम दिसम्बर में

इंद्र सराज़ी

रहती है सब के पास तन्हाई

इंद्र सराज़ी

दिन में जो साथ सब के हँसता था

इंद्र सराज़ी

दिल से दिल का रिश्ता होगा

इंद्र सराज़ी

सुख़न के सारे सलीक़े ज़बाँ में रखता है

इनाम-उल-हक़ जावेद

इंकिशाफ़

इनाम-उल-हक़ जावेद

ए'तिराफ़

इनाम-उल-हक़ जावेद

प्रोफ़ेसर ही जब आते हों हफ़्ता-वार कॉलेज में

इनाम-उल-हक़ जावेद

ये मोहब्बत भी एक नेकी है

इनाम नदीम

दरिया को किनारे से क्या देखते रहते हो

इनाम नदीम

अपनी ही रवानी में बहता नज़र आता है

इनाम नदीम

रास्ते जिस तरफ़ बुलाते हैं

इनाम नदीम

नहीं मालूम ये क्या कर चुके हैं

इनाम नदीम

ख़ुद अपने उजाले से ओझल रहा है दिया जल रहा है

इनाम नदीम

अपनी ही रवानी में बहता नज़र आता है

इनाम नदीम

आँख ने धोका खाया था या साया था

इनाम नदीम

ये रंग बे-रंग सारे मंज़र हैं एक जैसे

इनाम कबीर

वुफ़ूर-ए-हुस्न की लज़्ज़त से टूट जाते हैं

इनाम कबीर