Sufi Poetry (page 2)
फ़रोग़-ए-दीदा-वरी का ज़माना आया है
हुरमतुल इकराम
कोई भी शख़्स जो वहम-ओ-गुमाँ की ज़द में रहा
हीरानंद सोज़
कहीं पे माल-ओ-दुनिया की ख़रीदार की बातें हैं
हिना हैदर
दस्तक हवा ने दी है ज़रा ग़ौर से सुनो
हिमायत अली शाएर
सितम तीर-ए-निगाह-ए-दिलरुबा था
हिज्र नाज़िम अली ख़ान
मैं अक्सर सोचती हूँ ज़िंदगी को कौन लिक्खेगा
हिजाब अब्बासी
क़वी दिल शादमाँ दिल पारसा दिल
हसरत मोहानी
क्या वो अब नादिम हैं अपने जौर की रूदाद से
हसरत मोहानी
ख़ू समझ में नहीं आती तिरे दीवानों की
हसरत मोहानी
भुलाता लाख हूँ लेकिन बराबर याद आते हैं
हसरत मोहानी
आप ने क़द्र कुछ न की दिल की
हसरत मोहानी
हादिसा इश्क़ में दरपेश हुआ चाहता है
हाशिम रज़ा जलालपुरी
कमाँ उठाओ कि हैं सामने निशाने बहुत
हसन अज़ीज़
जलती हुई रुतों के ख़रीदार कौन हैं
हसन अख्तर जलील
तख़लीक़-ए-बे-सबात का ज़र्रा-नज़ीर हूँ
हक़ीर जहानी
उन्हें देखते ही फ़िदा हो गए हम
हंस राज सचदेव 'हज़ीं'
उन के आने पे दिल फ़िदा होगा
हंस राज सचदेव 'हज़ीं'
उल्टा चक्कर
हमीदा शाहीन
मआल-ए-दिल के लिए आज यूँ ख़ुदी तरसे
हामिद मुख़्तार हामिद
चाहे कुछ हो ज़ेर-ए-एहसाँ अपनी नादारी न रख
हामिद मुख़्तार हामिद
दर्द को रहने भी दे दिल में दवा हो जाएगी
हकीम मोहम्मद अजमल ख़ाँ शैदा
इश्क़ कर के देख ली जो बेबसी देखी न थी
हकीम नासिर
तुझ पे खुल जाएँगे ख़ुद अपने भी असरार कई
हकीम मंज़ूर
ढल गया जिस्म में आईने में पत्थर में कभी
हकीम मंज़ूर
क्या उन को दिल का हाल सुनाने से फ़ाएदा
हाजी लक़ लक़
मता-ए-दर्द का ख़ूगर मिरी तलाश में है
हैदर अली जाफ़री
मर्द-ए-दरवेश हूँ तकिया है तवक्कुल मेरा
हैदर अली आतिश
शो'ला-ए-दर्द ब-उन्वान-ए-तजल्ला ही सही
हाफ़िज़ लुधियानवी
यूँ उठा दे हमारे जी से ग़रज़
हफ़ीज़ जौनपुरी
वो हसीं बाम पर नहीं आता
हफ़ीज़ जौनपुरी