Nazam Poetry (page 110)
मैं शाम से शायद डूबी थी
फरीहा नक़वी
हमारे कमरे में पत्तियों की महक ने
फरीहा नक़वी
एक सौ बीस दिन
फरीहा नक़वी
एक पुराना ख़्वाब
फरीहा नक़वी
आईने से झाँकती नज़्म
फरीहा नक़वी
ख़तरे का निशान
फ़ारिग़ बुख़ारी
अपने दरिया की प्यास
फ़ारिग़ बुख़ारी
ज़ख़्म
फ़रहत एहसास
वा'दा
फ़रहत एहसास
उस तरफ़
फ़रहत एहसास
तुम नहीं माने
फ़रहत एहसास
तराना-ए-रेख़्ता
फ़रहत एहसास
तहरीर की फ़ुर्सत
फ़रहत एहसास
सुकूत
फ़रहत एहसास
शेर कह लेने के बाद
फ़रहत एहसास
साँप
फ़रहत एहसास
समुंदर
फ़रहत एहसास
रात हुई
फ़रहत एहसास
पीला कुत्ता
फ़रहत एहसास
पेश-ओ-पस
फ़रहत एहसास
ना-रसाई
फ़रहत एहसास
मामूल
फ़रहत एहसास
लहर का ठहराओ
फ़रहत एहसास
कूज़ा-गर
फ़रहत एहसास
ख़ुद-आगही
फ़रहत एहसास
हमवारी
फ़रहत एहसास
गुनाहों की धुँद
फ़रहत एहसास
दुनिया को कहाँ तक जाना है
फ़रहत एहसास
बिछड़े घर का साया
फ़रहत एहसास
बैज़ा-ए-नूर
फ़रहत एहसास