Nazam Poetry (page 108)
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फ़े सीन एजाज़
मुआ'फ़ी
फ़े सीन एजाज़
ख़िज़ाँ में चीनी चाय की दावत
फ़े सीन एजाज़
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फ़े सीन एजाज़
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फ़े सीन एजाज़
अलमिया-ए-नक़्द
फ़े सीन एजाज़
एयर-होस्टेस
फ़े सीन एजाज़
ज़ख़्मी उँगलियों से एक नज़्म
फ़ातिमा हसन
वो इक लम्हा
फ़ातिमा हसन
नज़्म
फ़ातिमा हसन
मेरी बेटी चलना सीख गई
फ़ातिमा हसन
मौसम की पहली बारिश
फ़ातिमा हसन
मनाज़िर ख़ूब-सूरत हैं
फ़ातिमा हसन
एक नज़्म माँ के लिए
फ़ातिमा हसन
अच्छा लगता है
फ़ातिमा हसन
आख़िरी लफ़्ज़
फ़ातिमा हसन
यूँ भी होता है कि अपने-आप आवाज़ देना पड़ती है
फर्रुख यार
उजलत में पशेमानी का तज़्किरा
फर्रुख यार
तिरे अद्ल के ऐवानों में
फर्रुख यार
रूह-ए-अस्र-ए-रवाँ
फर्रुख यार
मुझे खोल ताज़ा हवा में रख
फर्रुख यार
मालूम करो
फर्रुख यार
लकीरें
फर्रुख यार
कुश्तगान-ए-ख़ंजर-ए-तस्लीम-रा
फर्रुख यार
ख़बर मफ़क़ूद है लेकिन
फर्रुख यार
हम तो बस
फर्रुख यार
दो तहों वाली सरगोशी
फर्रुख यार
दिन गुज़र जाएगा
फर्रुख यार
अयाज़ चुप है
फर्रुख यार
ये कैसी रुत आ गई जुनूँ की
फ़ारूक़ नाज़की