दर Poetry (page 13)

था पस-ए-मिज़्गान-तर इक हश्र बरपा और भी

तौसीफ़ तबस्सुम

मेरी सूरत साया-ए-दीवार-ओ-दर में कौन है

तौसीफ़ तबस्सुम

मेरी सूरत साया-ए-दीवार-ओ-दर में कौन है

तौसीफ़ तबस्सुम

बजा कि दरपय-ए-आज़ार चश्म-ए-तर है बहुत

तौसीफ़ तबस्सुम

अजीब रंग थे दिल में जो आँसुओं में न थे

तौसीफ़ तबस्सुम

कल जहाँ दीवार ही दीवार थी

तौक़ीर तक़ी

लफ़्ज़ की क़ैद से रिहा हो जा

तौक़ीर तक़ी

दर्द जब से दिल-नशीं है इश्क़ है

तौक़ीर तक़ी

इस बार हुआ कुन का असर और तरह का

तसनीम आबिदी

जैसे कश्ती और उस पर बादबाँ फैले हुए

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

जैसे कश्ती और इस पर बादबाँ फैले हुए

तस्लीम इलाही ज़ुल्फ़ी

तुम ग़ैर से मिलो न मिलो मैं तो छोड़ दूँ

मीर तस्कीन देहलवी

गर मेरे बैठने से वो आज़ार खींचते

मीर तस्कीन देहलवी

ज़ेहन में हो कोई मंज़िल तो नज़र में ले जाऊँ

तसव्वुर ज़ैदी

इतना मुझे ख़ुदा मिरे मशहूर तू न कर

तरुणा मिश्रा

हवा रुकी है तो रक़्स-ए-शरर भी ख़त्म हुआ

तारिक़ क़मर

सारे ज़ख़्मों को ज़बाँ मिल गई ग़म बोलते हैं

तारिक़ क़मर

अजब नहीं दर-ओ-दीवार जैसे हो जाएँ

तारिक़ नईम

तुझ को इस तरह कहाँ छोड़ के जाना था हमें

तारिक़ नईम

फिर इस से क़ब्ल कि बार-ए-दिगर बनाया जाए

तारिक़ नईम

हवा का हुक्म भी अब के नज़र में रक्खा जाए

तारिक़ नईम

ब-नाम-ए-इश्क़ यही एक काम करते हैं

तारिक़ नईम

अपने दुखों का हम ने तमाशा नहीं किया

तारिक़ मतीन

लहू को पालते फिरते हैं हम हिना की तरह

तारिक़ मसऊद

मैं बाम-ओ-दर पे जो अब साएँ साएँ लिखता हूँ

तारिक़ जामी

मैं बाम-ओ-दर पे जो अब साएँ साएँ लिखता हूँ

तारिक़ जामी

डूबा हूँ तो किस शख़्स का चेहरा नहीं उतरा

तारिक़ जामी

वही आहटें दर-ओ-बाम पर वही रत-जगों के अज़ाब हैं

तारिक़ बट

कुछ दूर तक तो इस की सदा ले गई मुझे

तारिक़ बट

है किस का इंतिज़ार खुला घर का दर भी है

तारिक़ बट

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.