दिल Poetry (page 273)

हँसी गुलों में सितारों में रौशनी न मिली

दर्शन सिंह

गुलों पे ख़ाक-ए-मेहन के सिवा कुछ और नहीं

दर्शन सिंह

दौलत मिली जहान की नाम-ओ-निशाँ मिले

दर्शन सिंह

चश्म-ए-बीना हो तो क़ैद-ए-हरम-ओ-तूर नहीं

दर्शन सिंह

आज दिल से दुआ करे कोई

दर्शन सिंह

साक़ी मिरे भी दिल की तरफ़ टुक निगाह कर

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

क़ासिद नहीं ये काम तिरा अपनी राह ले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मुझे ये डर है दिल-ए-ज़िंदा तू न मर जाए

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मैं जाता हूँ दिल को तिरे पास छोड़े

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

हो गया मेहमाँ-सरा-ए-कसरत-ए-मौहूम आह

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

गली से तिरी दिल को ले तो चला हूँ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

दर्द-ए-दिल के वास्ते पैदा किया इंसान को

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअत को पा सके

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तुझी को जो याँ जल्वा-फ़रमा न देखा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तोहमत-ए-चंद अपने ज़िम्मे धर चले

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मिरा जी है जब तक तिरी जुस्तुजू है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

मदरसा या दैर था या काबा या बुत-ख़ाना था

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

इश्क़ हर-चंद मिरी जान सदा खाता है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

बाग़-ए-जहाँ के गुल हैं या ख़ार हैं तो हम हैं

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अर्ज़-ओ-समा कहाँ तिरी वुसअ'त को पा सके

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

अगर यूँ ही ये दिल सताता रहेगा

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

तमन्ना का दूसरा क़दम

दानियाल तरीर

मैं नफ़ी में

दानियाल तरीर

एक सब आग एक सब पानी

दानियाल तरीर

आवाज़ का नौहा

दानियाल तरीर

नई नई सूरतें बदन पर उजालता हूँ

दानियाल तरीर

जरस और सारबानों तक पहुँचना चाहता है

दानियाल तरीर

सितम के बा'द भी बाक़ी करम की आस तो है

दानिश फ़राही

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