दिल Poetry (page 367)

रो रो के बयाँ करते फिरो रंज-ओ-अलम ख़ूब

अजमल सिद्दीक़ी

न नज़र से कोई गुज़र सका न ही दिल से मलबा हटा सका

अजमल सिद्दीक़ी

दुखे दिलों पे जो पड़ जाए वो तबीब नज़र

अजमल सिद्दीक़ी

अलग अलग तासीरें इन की, अश्कों के जो धारे हैं

अजमल सिद्दीक़ी

याद-ए-फ़िराक-ए-यार तिरा शुक्रिया बहुत

अजमल अजमली

वक़्त-ए-सफ़र क़रीब है बिस्तर समेट लूँ

अजमल अजमली

तिरी नज़र भी नहीं हर्फ़-ए-मुद्दआ भी नहीं

अजमल अजमली

शहर शहर ढूँड आए दर-ब-दर पुकार आए

अजमल अजमली

रास्ते के पेच-ओ-ख़म क्या शय हैं सोचा ही नहीं

अजमल अजमली

हर घड़ी रहता है अब ख़दशा मुझे

अजमल अजमली

फ़िरऔन-ए-वक़्त कोई भी हो सर-कशी करो

अजमल अजमली

ऐ हुस्न जब से राज़ तिरा पा गए हैं हम

अजमल अजमली

हसरतें आ आ के जम्अ हो रही हैं दिल के पास

आजिज़ मातवी

यूँ तुझ से दूर दूर रहूँ ये सज़ा न दे

आजिज़ मातवी

मौजूद हैं वो भी बालीं पर अब मौत का टलना मुश्किल है

आजिज़ मातवी

मय-ख़ाने पर काले बादल जब घिर घिर कर आते हैं

आजिज़ मातवी

क्यूँ कहूँ कोई क़द-आवर नहीं आया अब तक

आजिज़ मातवी

जहाँ न दिल को सुकून है न है क़रार मुझे

आजिज़ मातवी

हसरतें आ आ के जम्अ हो रही हैं दिल के पास

आजिज़ मातवी

हर-सू जहाँ में शाम ओ सहर ढूँडते हैं हम

आजिज़ मातवी

हंगामा क्यूँ बपा है ज़रा बाम पर से देख

आजिज़ मातवी

दर्द-ए-मुसलसल से आहों में पैदा वो तासीर हुई

आजिज़ मातवी

ज़िंदगी में प्यार का सौदा करो

अजीत सिंह हसरत

ज़माने हो गए तेरे करम की आस लगी

अजीत सिंह हसरत

जुस्तुजू में कमाल करता जा

अजीत सिंह हसरत

घोंसले राख हो गए जल के

अजीत सिंह हसरत

इक याद सो रहे को उठाती है आज भी

अजीत सिंह हसरत

उन को अपने क़रीब देखा है

अजीत कुमार दिल

ऐसे सुलग उठा तिरी यादों से दिल मिरा

अजय सहाब

वो जो फूल थे तिरी याद के तह-ए-दस्त-ए-ख़ार चले गए

अजय सहाब

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