शोक Poetry (page 125)

इस मरीज़-ए-ग़म-ए-ग़ुर्बत को सँभाला दे दो

अक़ील दानिश

सुकून-ए-दिल न मयस्सर हुआ ज़माने में

अनवापुल हसन अनवार

हुस्न हर रंग में मख़्सूस कशिश रखता है

अनवापुल हसन अनवार

वो मक़्तल में अगर खींचे हुए तलवार बैठे हैं

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

कहाँ मुमकिन है पोशीदा ग़म-ए-दिल का असर होना

अनवरी जहाँ बेगम हिजाब

हुजूम शोला में था हल्क़ा-ए-शरर में था

अनवर सिद्दीक़ी

ज़हर की चुटकी ही मिल जाए बराए दर्द-ए-दिल

अनवर शऊर

न सह सकूँगा ग़म-ए-ज़ात गो अकेला मैं

अनवर शऊर

हवस बला की मोहब्बत हमें बला की है

अनवर शऊर

रंगीं बना के दामन-ए-ज़ख़्म-ए-जिगर को मैं

अनवर सहारनपुरी

जल्वे दिखाए यार ने अपनी हरीम-ए-नाज़ में

अनवर सहारनपुरी

ज़िंदगी के हसीं बहाने से

अनवर साबरी

वो नीची निगाहें वो हया याद रहेगी

अनवर साबरी

वक़्त जब करवटें बदलता है

अनवर साबरी

उम्र गुज़री है इल्तिजा करते

अनवर साबरी

तसव्वुर के सहारे यूँ शब-ए-ग़म ख़त्म की मैं ने

अनवर साबरी

तलख़ाबा-ए-ग़म ख़ंदा-जबीं हो के पिए जा

अनवर साबरी

शब-ए-फ़िराक़ की ज़ुल्मत है ना-गवार मुझे

अनवर साबरी

रहते हुए क़रीब जुदा हो गए हो तुम

अनवर साबरी

कुछ अबरुओं पे बल भी हैं ख़ंदा-लबी के साथ

अनवर साबरी

इश्क़ में ग़म के सिवा कोई ख़ुशी देखी नहीं

अनवर साबरी

हासिल-ए-ग़म यही समझते हैं

अनवर साबरी

दौर-ए-हाज़िर हो गया है इस क़दर कम-आश्ना

अनवर साबरी

अता-ए-ग़म पे भी ख़ुश हूँ मिरी ख़ुशी क्या है

अनवर साबरी

उसी अमल की ज़रा सी शराब देता चल

अनवर नदीम

रुख़ से पर्दा उठा दे ज़रा साक़िया बस अभी रंग-ए-महफ़िल बदल जाएगा

अनवर मिर्ज़ापुरी

मैं तो समझा था जिस वक़्त मुझ को वो मिलेंगे तो जन्नत मिलेगी

अनवर मिर्ज़ापुरी

किसी सूरत भी नींद आती नहीं मैं कैसे सो जाऊँ

अनवर मिर्ज़ापुरी

एहसास की रगों में उतरने लगा है वो

अनवर मीनाई

मेरी क़िस्मत कि वो अब हैं मिरे ग़म-ख़्वारों में

अनवर मसूद

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