गुल Poetry (page 16)

बग़ैर-ए-साग़र-ओ-यार-ए-जवाँ नहीं गुज़रे

सिराजुद्दीन ज़फ़र

बग़ैर साग़र ओ यार-ए-जवाँ नहीं गुज़रे

सिराजुद्दीन ज़फ़र

और खुल जा कि मआ'रिफ़ की गुज़रगाहों में

सिराजुद्दीन ज़फ़र

न कुरेदूँ इश्क़ के राज़ को मुझे एहतियात-ए-कलाम है

सिराज लखनवी

मुझे अब हवा-ए-चमन नहीं कि क़फ़स में गूना क़रार है

सिराज लखनवी

लिया जन्नत में भी दोज़ख़ का सहारा हम ने

सिराज लखनवी

कचेहरी में चमन की हर तरफ़ फ़रियाद बुलबुल है

सिराज औरंगाबादी

देखा है जिस ने यार के रुख़्सार की तरफ़

सिराज औरंगाबादी

बुत-परस्तों कूँ है ईमान-ए-हक़ीक़ी वस्ल-ए-बुत

सिराज औरंगाबादी

ऐ शोख़ गुलिस्ताँ मैं नहीं ये गुल-ए-रंगीं

सिराज औरंगाबादी

ज़ुल्फ़-ए-मुश्कीन-ए-यार क़हरी है

सिराज औरंगाबादी

ज़ालिम मिरे जिगर कूँ करे क्यूँ न फाँक फाँक

सिराज औरंगाबादी

या-रब कहाँ गया है वो सर्व-ए-शोख़-रा'ना

सिराज औरंगाबादी

यार जब पेश-ए-नज़र होता है

सिराज औरंगाबादी

यक निगह सें लिया है वो गुलफ़ाम

सिराज औरंगाबादी

उश्शाक़ का दिल दाग़ का अंदाज़ा हुआ महज़

सिराज औरंगाबादी

तुम्हारी ज़ुल्फ़ का हर तार मोहन

सिराज औरंगाबादी

तिरी ज़ुल्फ़ ज़ुन्नार का तार है

सिराज औरंगाबादी

तेरी भँवों की तेग़ के जो रू-ब-रू हुआ

सिराज औरंगाबादी

सुने रातों कूँ गर जंगल में मेरे ग़म की वावैला

सिराज औरंगाबादी

सीमाब जल गया तो उसे गर्द बोलिए

सिराज औरंगाबादी

सर्व-ए-गुलशन पर सुख़न उस क़द का बाला हो गया

सिराज औरंगाबादी

सनम ख़ुश तबईयाँ सीखे हो तुम किन किन ज़रीफ़ों सीं

सिराज औरंगाबादी

सनम जब चीरा-ए-ज़र-तार बाँधे

सिराज औरंगाबादी

सनम हज़ार हुआ तो वही सनम का सनम

सिराज औरंगाबादी

पी कर शराब-ए-शौक़ कूँ बेहोश हो बेहोश हो

सिराज औरंगाबादी

मुस्कुरा कर आशिक़ों पर मेहरबानी कीजिए

सिराज औरंगाबादी

मज्लिस-ए-ऐश गर्म हो या-रब

सिराज औरंगाबादी

माइल हूँ गुल-बदन का मुझे गुल सीं क्या ग़रज़

सिराज औरंगाबादी

महरम-ए-दिल हुआ वो सहरा वा

सिराज औरंगाबादी

Collection of Hindi Poetry. Get Best Hindi Shayari, Poems and ghazal. Read shayari Hindi, poetry by famous Hindi and Urdu poets. Share poetry hindi on Facebook, Whatsapp, Twitter and Instagram.