हुआ Poetry (page 36)

न मिरे पास इज़्ज़त-ए-रमज़ाँ

ताबाँ अब्दुल हई

मरने की मुझ को आप से हैं इज़तिराबियाँ

ताबाँ अब्दुल हई

लड़का जो ख़ूब-रू है सो मुझ से बचा नहीं

ताबाँ अब्दुल हई

किसी का काम दिल इस चर्ख़ से हुआ भी है

ताबाँ अब्दुल हई

किसी गुल में नहीं पाने की तू बू-ए-वफ़ा हरगिज़

ताबाँ अब्दुल हई

खोता ही नहीं है हवस-ए-मतअम-ओ-मलबस

ताबाँ अब्दुल हई

एक ही जाम को पिला साक़ी

ताबाँ अब्दुल हई

अज़ीज़ाँ सितमगर न आया मिरे घर

ताबाँ अब्दुल हई

आई बहार शोरिश-तिफ़लाँ को क्या हुआ

ताबाँ अब्दुल हई

कोई भी नक़्श सलामत नहीं है चेहरे का

ताब असलम

दिल के सहरा में बड़े ज़ोर का बादल बरसा

ताब असलम

नज्द से जानिब-ए-लैला जो हवा आती है

तअशशुक़ लखनवी

मौज-ए-दरिया से बला की चाहिए कश्ती मुझे

तअशशुक़ लखनवी

बहुत मुज़िर दिल-ए-आशिक़ को आह होती है

तअशशुक़ लखनवी

ता-सहर की है फ़ुग़ाँ जान के ग़ाफ़िल मुझ को

तअशशुक़ लखनवी

दो दमों से है फ़क़त गोर-ए-ग़रीबाँ आबाद

तअशशुक़ लखनवी

तूफ़ाँ नहीं गुज़रे कि बयाबाँ नहीं गुज़रे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

तन-आसानी नहीं जाती रिया-कारी नहीं जाती

सय्यद ज़मीर जाफ़री

तजर्बात-ए-तल्ख़ ने हर-चंद समझाया मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

जुनूँ पे जब्र-ए-ख़िरद जब भी होश्यार हुआ

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपनी ख़बर नहीं है ब-जुज़ इस क़दर मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

अपनी ख़बर नहीं है ब-जुज़ ईं क़दर मुझे

सय्यद ज़मीर जाफ़री

कहते हो सब कि तुझ से ख़फ़ा हो गया है यार

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

जाती नहीं है सई रह-ए-आशिक़ी में पेश

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

आ गया ध्यान में मज़मूँ तिरी यकताई का

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

तेरे दर से मैं उठा लेकिन न मेरा दिल उठा

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

मोहताज नहीं क़ाफ़िला आवाज़-ए-दरा का

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

जब कहो क्यूँ हो ख़फ़ा क्या बाइ'स

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

जाँ-फ़िशानी का वाँ हिसाब अबस

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

बे-दिए ले उड़ा कबूतर ख़त

सय्यद यूसुफ़ अली खाँ नाज़िम

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