जान Poetry (page 44)

उस ने देखा था अजब एक तमाशा मुझ में

एजाज़ उबैद

दिखाता क्या है ये टूटी हुई कमान मुझे

एजाज़ उबैद

हम तुम जब भी प्यार करेंगे जान-ओ-दिल सदक़े होंगे

एजाज़ गुल

कतबा

एजाज़ फ़ारूक़ी

फ़ासलों की बात

एजाज़ अहमद एजाज़

यूँ उस पे मिरी अर्ज़-ए-तमन्ना का असर था

एहसान दानिश

कुछ लोग जो सवार हैं काग़ज़ की नाव पर

एहसान दानिश

तमाशा मिरे आगे

दिलावर फ़िगार

शायर-ए-आज़म

दिलावर फ़िगार

शदीद गरमी के मौसम में मुशाइरा

दिलावर फ़िगार

मौसीक़ी से इलाज

दिलावर फ़िगार

'ग़ालिब' को बुरा क्यूँ कहो

दिलावर फ़िगार

क्रिकेट और मुशाइरा

दिलावर फ़िगार

ज़मीन अपने ही मेहवर से हट रही होगी

दिलावर अली आज़र

मैं सिर्फ़ वो नहीं जो नज़र आ गया तुझे

दिल अय्यूबी

सुनहरी मछली

दीप्ति मिश्रा

मोहब्बत में यही झगड़ा करोगे

दीपक शर्मा दीप

हमारी जान तुम ऐसा करोगी

दीपक शर्मा दीप

मिरी बे-क़रारी मिरी आह-ओ-ज़ारी ये वहशत नहीं है तो फिर और क्या है

द्वारका दास शोला

गुलशन-ए-जग में ज़रा रंग-ए-मोहब्बत नीं है

दाऊद औरंगाबादी

सूरत-ए-हाल अब तो वो नक़्श-ए-ख़याली हो गया

दत्तात्रिया कैफ़ी

इश्क़ ही इश्क़ हो आशिक़ हो न माशूक़ जहाँ

दत्तात्रिया कैफ़ी

हुस्न-ए-अज़ल का जल्वा हमारी नज़र में है

दत्तात्रिया कैफ़ी

तमाम नूर-ए-तजल्ली तमाम रंग-ए-चमन

दर्शन सिंह

रब्त है नाज़-ए-बुताँ को तो मिरी जान के साथ

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

इश्क़ हर-चंद मिरी जान सदा खाता है

ख़्वाजा मीर 'दर्द'

ज़ीस्त से तंग हो ऐ 'दाग़' तो जीते क्यूँ हो

दाग़ देहलवी

ले चला जान मिरी रूठ के जाना तेरा

दाग़ देहलवी

इस लिए वस्ल से इंकार है हम जान गए

दाग़ देहलवी

इफ़्शा-ए-राज़-ए-इश्क़ में गो ज़िल्लतें हुईं

दाग़ देहलवी

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