भगवान Poetry (page 56)

सहारा मौजों का ले ले के बढ़ रहा हूँ मैं

बेदम शाह वारसी

पास-ए-अदब मुझे उन्हें शर्म-ओ-हया न हो

बेदम शाह वारसी

काबे का शौक़ है न सनम-ख़ाना चाहिए

बेदम शाह वारसी

तरहदार कहाँ से लाऊँ

बेबाक भोजपुरी

रक़्क़ासा-ए-औहाम

बेबाक भोजपुरी

नक़्श बर-दीवार

बेबाक भोजपुरी

अहसन तक़्वीम

बेबाक भोजपुरी

सरीर-ए-ख़ामा से तशरीह-ए-सिर्र-ए-ज़ी होगी

बेबाक भोजपुरी

हक़ पसंदों से जहाँ बर-सर-ए-पैकार सही

बेबाक भोजपुरी

बख़्त क्या जाने भला या कि बुरा होता है

बेबाक भोजपुरी

नहीं ये आदमी का काम वाइ'ज़

बयान मेरठी

ये मैं कहूँगा फ़लक पे जा कर ज़मीं से आया हूँ तंग आ कर

बयान मेरठी

सुब्ह क़यामत आएगी कोई न कह सका कि यूँ

बयान मेरठी

कोई किसी का कहीं आश्ना नहीं देखा

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

इश्वा है नाज़ है ग़म्ज़ा है अदा है क्या है

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

फ़रहाद किस उम्मीद पे लाता है जू-ए-शीर

बयाँ अहसनुल्लाह ख़ान

पूछते हैं वो इश्क़ का मतलब

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

जब मिलेंगे कि अब मिलेंगे आप

बशीरुद्दीन अहमद देहलवी

उतर भी आओ कभी आसमाँ के ज़ीने से

बशीर बद्र

सब लोग अपने अपने ख़ुदाओं को लाए थे

बशीर बद्र

फिर से ख़ुदा बनाएगा कोई नया जहाँ

बशीर बद्र

मैं ने दिन रात ख़ुदा से ये दुआ माँगी थी

बशीर बद्र

किसी ने चूम के आँखों को ये दुआ दी थी

बशीर बद्र

गले में उस के ख़ुदा की अजीब बरकत है

बशीर बद्र

वो चाँदनी का बदन ख़ुशबुओं का साया है

बशीर बद्र

वो अपने घर चला गया अफ़्सोस मत करो

बशीर बद्र

वही ताज है वही तख़्त है वही ज़हर है वही जाम है

बशीर बद्र

उदास रात है कोई तो ख़्वाब दे जाओ

बशीर बद्र

सोचा नहीं अच्छा बुरा देखा सुना कुछ भी नहीं

बशीर बद्र

सर-ए-राह कुछ भी कहा नहीं कभी उस के घर मैं गया नहीं

बशीर बद्र

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