लोग Poetry (page 47)

आसमाँ पर काले बादल छा गए

बद्र-ए-आलम ख़लिश

जो झुक के मिलते थे जलसों में मेहरबाँ की तरह

बदनाम नज़र

रौशनी ही रौशनी है शहर में

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

महसूस हो रहा है जो ग़म मेरी ज़ात का

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

है बहुत मुश्किल निकलना शहर के बाज़ार में

बदीउज़्ज़माँ ख़ावर

कुछ नहीं होता शब भर सोचों का सरमाया होता है

अज़रक़ अदीम

फ़ीमेल बुल-फ़ाइटर

अज़रा अब्बास

दरीदा-पैरहनों में शुमार हम भी हैं

अज़्म शाकरी

चाँद सा चेहरा कुछ इतना बेबाक हुआ

अज़्म शाकरी

हारे हुए लोगों की कहानी की तरह हैं

अज़लान शाह

एड़ियाँ मार के ज़ख़्मी भी हुए लोग मगर

अज़लान शाह

सफ़र के ब'अद भी सफ़र का एहतिमाम कर रहा हूँ मैं

अज़लान शाह

क़ुबूल होती हुई बद-दुआ से डरते हैं

अज़लान शाह

हारे हुए लोगों की कहानी की तरह हैं

अज़लान शाह

बे-यक़ीनी का तअल्लुक़ भी यक़ीं से निकला

अज़लान शाह

यादों का जज़ीरा शब-ए-तन्हाई में

अज़ीज़ुर्रहमान शहीद फ़तेहपुरी

अहद-नामा-ए-इमराेज़

अज़ीज़ क़ैसी

आख़िरी दिन से पहले

अज़ीज़ क़ैसी

फिर नए साल की सरहद पे खड़े हैं हम लोग

अज़ीज़ नबील

मैं अपने गिर्द लकीरें बिछाए बैठा हूँ

अज़ीज़ नबील

जिस तरफ़ चाहूँ पहुँच जाऊँ मसाफ़त कैसी

अज़ीज़ नबील

इस बार हवाओं ने जो बेदाद-गरी की

अज़ीज़ नबील

आएँगे नज़र सुब्ह के आसार में हम लोग

अज़ीज़ नबील

जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए

अज़ीज़ लखनवी

जीते हैं कैसे ऐसी मिसालों को देखिए

अज़ीज़ लखनवी

वो लोग जिन से तिरी बज़्म में थे हंगामे

अज़ीज़ हामिद मदनी

वक़्त ही वो ख़त-ए-फ़ासिल है कि ऐ हम-नफ़सो

अज़ीज़ हामिद मदनी

उन को ऐ नर्म हवा ख़्वाब-ए-जुनूँ से न जगा

अज़ीज़ हामिद मदनी

ख़ूँ हुआ दिल कि पशीमान-ए-सदाक़त है वफ़ा

अज़ीज़ हामिद मदनी

ग़म-ए-हयात ओ ग़म-ए-दोस्त की कशाकश में

अज़ीज़ हामिद मदनी

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