नाम Poetry (page 15)

बीमार सा है जिस्म-ए-सहर काँप रहा है

सुलेमान ख़ुमार

इबलाग़

सुलैमान अरीब

प्यार का दर्द का मज़हब नहीं होता कोई

सुलैमान अरीब

हिसाब-ए-उम्र करो या हिसाब-ए-जाम करो

सुलैमान अरीब

हर बात तिरी जान-ए-जहाँ मान रहा हूँ

सुलैमान अरीब

ग़म-कदे वो जो तिरे गाम से जल उठते हैं

सुलैमान अरीब

तुझे क्या हुआ है बता ऐ दिल न सुकून है न क़रार है

सुलैमान अहमद मानी

पेड़ ऊँचा है मगर ज़ेर-ए-ज़मीं कितना है

सुहैल अहमद ज़ैदी

पेड़ ऊँचा है मगर ज़ेर-ए-ज़मीं कितना है

सुहैल अहमद ज़ैदी

इसी मामूल-ए-रोज़-ओ-शब में जी का दूसरा होना

सुहैल अहमद ज़ैदी

'अंजुम' पे जो गुज़र गई उस का भला हिसाब क्या

सूफ़िया अनजुम ताज

बंद हो जाए मिरी आँख अगर

सूफ़ी तबस्सुम

ज़बाँ करती है दिल की तर्जुमानी देखते जाओ

सूफ़ी तबस्सुम

जान दे कर वफ़ा में नाम किया

सूफ़ी तबस्सुम

हर एक नक़्श तिरे पाँव का निशाँ सा है

सूफ़ी तबस्सुम

ऐसे भी थे कुछ हालात

सूफ़ी तबस्सुम

उल्फ़त का जब किसी ने लिया नाम रो पड़े

सुदर्शन फ़ाकिर

दिल के दीवार-ओ-दर पे क्या देखा

सुदर्शन फ़ाकिर

मुझे मलाल में रखना ख़ुशी तुम्हारी थी

सुबहान असद

बहते पानी की तरह मौज-ए-सदा की सूरत

सोज़ नजीबाबादी

समझते थे ,वो समझाया गया है

सोनरूपा विशाल

फूल सब के लिए महकते हैं

सोनरूपा विशाल

एक इक क़तरा जोड़ कर रक्खा

सोनरूपा विशाल

वो नग़्मगी का ज़ाइक़ा उस की सदा में था

सोहन राही

मेरी रुस्वाई का यूँ जश्न मनाया तुम ने

सिया सचदेव

जिस दिन से मिरी तुम से शनासाई हुई है

सिया सचदेव

उठो ज़माने के आशोब का इज़ाला करें

सिराजुद्दीन ज़फ़र

मौसम-ए-गुल तिरे इनआ'म अभी बाक़ी हैं

सिराजुद्दीन ज़फ़र

इस्लाह-ए-अहल-ए-होश का यारा नहीं हमें

सिराजुद्दीन ज़फ़र

और खुल जा कि मआ'रिफ़ की गुज़रगाहों में

सिराजुद्दीन ज़फ़र

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