शहर Poetry (page 23)

सीने में जलन आँखों में तूफ़ान सा क्यूँ है

शहरयार

शम-ए-दिल शम-ए-तमन्ना न जला मान भी जा

शहरयार

शदीद प्यास थी फिर भी छुआ न पानी को

शहरयार

कारोबार-ए-शौक़ में बस फ़ाएदा इतना हुआ

शहरयार

कहने को तो हर बात कही तेरे मुक़ाबिल

शहरयार

कहाँ तक वक़्त के दरिया को हम ठहरा हुआ देखें

शहरयार

जहाँ मैं होने को ऐ दोस्त यूँ तो सब होगा

शहरयार

इन आँखों की मस्ती के मस्ताने हज़ारों हैं

शहरयार

हवा का ज़ोर ही काफ़ी बहाना होता है

शहरयार

हँस रहा था मैं बहुत गो वक़्त वो रोने का था

शहरयार

हमारी आँख में नक़्शा ये किस मकान का है

शहरयार

देख दरिया को कि तुग़्यानी में है

शहरयार

आँख की ये एक हसरत थी कि बस पूरी हुई

शहरयार

ख़ला सा कहीं है

शहराम सर्मदी

याद की बस्ती का यूँ तो हर मकाँ ख़ाली हुआ

शहराम सर्मदी

ख़ला सा ठहरा हुआ है ये चार-सू कैसा

शहराम सर्मदी

फ़ज़ा होती ग़ुबार-आलूदा सूरज डूबता होता

शहराम सर्मदी

हुसैन! तोमी कोथाए

शहनाज़ नबी

मिरे ख़ुदा कोई छाँव कोई ज़मीं कोई घर

शहनवाज़ ज़ैदी

जब आफ़्ताब से चेहरा छुपा रही थी हवा

शहनवाज़ ज़ैदी

दिल भी दाग़-ए-नक़्श-ए-कुहन से बुझा हुआ था

शहनवाज़ ज़ैदी

कभी क़लम कभी नेज़ों पे सर उछलते हैं

शाहजहाँ बानो याद

अक़्ल-ओ-दिल को मिला-जुला रखिए

शाहजहाँ बानो याद

याद के शहर मिरी जाँ से गुज़र

शाहिदा तबस्सुम

जंगलों में बारिशें हैं दूर तक

शाहिदा तबस्सुम

सराब-ए-शब भी है ख़्वाब-ए-शिकस्ता-पा भी है

शाहिदा हसन

लम्स आहट के हवाओं के निशाँ कुछ भी नहीं

शाहिदा हसन

अब तिरी याद से वहशत नहीं होती मुझ को

शाहिद ज़की

सीने की मिसाल आग है चाँदी सा धुआँ है

शाहिद शैदाई

ज़िंदगी मेरी हुई है फिर निढाल

शाहिद नईम

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