शहर Poetry (page 21)

हवस-ए-वक़्त का अंदाज़ा लगाया जाए

शकेब अयाज़

शब-ए-तन्हाई

शाइस्ता मुफ़्ती

अजनबी शहर में उल्फ़त की नज़र को तरसे

शाइस्ता मुफ़्ती

तुम आओगे

शाइस्ता हबीब

ये मसला शैख़ से पूछो हम इस झगड़े से फ़ारिग़ है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

नज़र में उस की जो चढ़ता है सो जीता नहीं बचता

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

मेरी फ़रियाद कोई नईं सुनता

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

किस से कहूँ मैं हाल-ए-दिल अपना कि ता सुने

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

दिल देखते ही उस को गिरफ़्तार हो गया

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

छुपाता क्या है मुँह कब तक छुपेगा

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

वहशत से हर सुख़न मिरा गोया ग़ज़ाला है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

फिर ख़बर इस फ़स्ल में यारो बहार आने की है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

इश्क़ के शहर की कुछ आब-ओ-हवा और ही है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

बाग़ में तू कभू जो हँसता है

शैख़ ज़हूरूद्दीन हातिम

देख इन आँखों से क्या जल-थल कर रक्खा है

शहज़ाद क़मर

रदीफ़ क़ाफ़िया बंदिश ख़याल लफ़्ज़-गरी

शहज़ाद क़ैस

कफ़न-चोर

शहज़ाद नय्यर

जो कुछ भी मेरे पास थी दौलत निगल गई

शहज़ाद हुसैन साइल

शब ढल गई और शहर में सूरज निकल आया

शहज़ाद अहमद

कोई तो रात को देखेगा जवाँ होते हुए

शहज़ाद अहमद

किस लिए वो शहर की दीवार से सर फोड़ता

शहज़ाद अहमद

हमारे शहर में है वो गुरेज़ का आलम

शहज़ाद अहमद

बिगड़ी हुई इस शहर की हालत भी बहुत है

शहज़ाद अहमद

भूल कर भी कोई लेता नहीं अब नाम-ए-वफ़ा

शहज़ाद अहमद

अजनबी शहरों में तुझ को ढूँढता हूँ जिस तरह

शहज़ाद अहमद

यूँ ख़ाक की मानिंद न राहों पे बिखर जा

शहज़ाद अहमद

ये न हो वो भूलने वाला भुला देना पड़े

शहज़ाद अहमद

उम्र जितनी भी कटी उस के भरोसे पे कटी

शहज़ाद अहमद

तुझ पे जाँ देने को तय्यार कोई तो होगा

शहज़ाद अहमद

थोड़ा सा रंग रात के चेहरे पे डाल दो

शहज़ाद अहमद

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