शहर Poetry (page 19)

आख़िरी तमाशाई

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

उन का ख़याल हर तरफ़ उन का जमाल हर तरफ़

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

अब मुझ से ये रात तय न होगी

शम्सुर रहमान फ़ारूक़ी

ज़मीन तंग है यारब कि आसमान है तंग

शम्स रम्ज़ी

लफ़्ज़-ओ-मा'नी के समुंदर का सफ़र हैं कुछ लोग

शम्स रम्ज़ी

मिरे ए'तिमाद को ग़म मिला मिरी जब किसी पे नज़र गई

शम्स फ़र्रुख़ाबादी

जब भी तुम्हारी याद की आहट मुझे मिली

शम्स फ़रीदी

तमाम शहर ब-यक-वक़्त जल गया कैसे

शमीम तारिक़

क़बीला-वार अदावत का सिलसिला 'तारिक़'

शमीम तारिक़

लोग क्यूँ ढूँड रहे हैं मुझे पत्थर ले कर

शमीम तारिक़

किसी से पूछें कौन बताए किस ने महशर देखा है

शमीम तारिक़

नया लहजा ग़ज़ल का मिस्रा-ए-सानी में रक्खा है

शमीम क़ासमी

याद की सुब्ह ढल गई शौक़ की शाम हो गई

शमीम करहानी

पी कर भी तबीअत में तल्ख़ी है गिरानी है

शमीम करहानी

निकल पड़े हैं सनम रात के शिवाले से

शमीम करहानी

मुझे दैर से तअल्लुक़ न हरम से आश्नाई

शमीम करहानी

माना कि सई-ए-इश्क़ का अंजाम-कार क्या

शमीम करहानी

हँसो न तुम रुख़-ए-दुश्मन जो ज़र्द है यारो

शमीम करहानी

अनमोल सही नायाब सही बे-दाम-ओ-दिरम बिक जाते हैं

शमीम करहानी

बे-गुनाही का हर एहसास मिटा दे कोई

शमीम जयपुरी

बंद कर के खिड़कियाँ यूँ रात को बाहर न देख

शमीम हनफ़ी

ये रिश्ता-ए-जाँ मेरी तबाही का सबब है

शमीम हनफ़ी

क्यूँ परेशान हुआ जाता है दिल क्या जाने

शमीम हनफ़ी

बंद कर ले खिड़कियाँ यूँ रात को बाहर न देख

शमीम हनफ़ी

बंद कर के खिड़कियाँ यूँ रात को बाहर न देख

शमीम हनफ़ी

ज़िंदगी हँसती है सुब्ह-ओ-शाम तेरे शहर में

शमीम फ़तेहपुरी

कौन सा शो'ला लपकता है ये महमिल के क़रीब

शमीम फ़तेहपुरी

शर्मीली छूई-मूई अजब मोहनी सी थी

शमीम फ़ारूक़ी

मिरे हाथ की सब दुआ ले गया

शमीम फ़ारूक़ी

उसे न मिलने की सोचा है यूँ सज़ा देंगे

शमीम अब्बास

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