शहर Poetry (page 58)

हर एक रास्ते का हम-सफ़र रहा हूँ मैं

फ़ारिग़ बुख़ारी

दिल के घाव जब आँखों में आते हैं

फ़ारिग़ बुख़ारी

दो झुकी आँखों का पहुँचा जब मिरे दिल को सलाम

फ़रहत शहज़ाद

राज़ उबल पड़े आख़िर आसमाँ के सीनों से

फ़रहत क़ादरी

आई ख़िज़ाँ चमन में गए दिन बहार के

फ़रहत क़ादरी

कोई अहद-ए-वफ़ा भूला हुआ हूँ

फ़रहत नदीम हुमायूँ

ये धड़कता हुआ दिल उस के हवाले कर दूँ

फ़रहत एहसास

तमाम शहर की आँखों में रेज़ा रेज़ा हूँ

फ़रहत एहसास

आँख भर देख लो ये वीराना

फ़रहत एहसास

सुकूत

फ़रहत एहसास

लहर का ठहराओ

फ़रहत एहसास

बिछड़े घर का साया

फ़रहत एहसास

ये सारे ख़ूबसूरत जिस्म अभी मर जाने वाले हैं

फ़रहत एहसास

उधर वो दश्त-ए-मुसलसल इधर मुसलसल मैं

फ़रहत एहसास

तू मुझ को जो इस शहर में लाया नहीं होता

फ़रहत एहसास

तेरे सूरज को तिरी शाम से पहचानते हैं

फ़रहत एहसास

तेरा भला हो तू जो समझता है मुझ को ग़ैर

फ़रहत एहसास

तमाम शहर की ख़ातिर चमन से आते हैं

फ़रहत एहसास

सूने सियाह शहर पे मंज़र-पज़ीर मैं

फ़रहत एहसास

सब ने'मतें हैं शहर में इंसान ही नहीं

फ़रहत एहसास

सब मिरा आब-ए-रवाँ किस के इशारों पे बहा जाता है

फ़रहत एहसास

रौनक़-ए-ज़हर हो चुका मिरा दिल

फ़रहत एहसास

रास्ते हम से राज़ कहने लगे

फ़रहत एहसास

रास्ता दे ऐ हुजूम-ए-शहर घर जाएँगे हम

फ़रहत एहसास

रक़्स-ए-इल्हाम कर रहा हूँ

फ़रहत एहसास

पुराना ज़ख़्म जिसे तजरबा ज़ियादा है

फ़रहत एहसास

पैकर-ए-अक़्ल तिरे होश ठिकाने लग जाएँ

फ़रहत एहसास

मोहब्बत चाहते हो क्यूँ वफ़ा क्यूँ माँगते हो

फ़रहत एहसास

मौत ही एक दवा है और वो जारी है

फ़रहत एहसास

लोग यूँ जाते नज़र आते हैं मक़्तल की तरफ़

फ़रहत एहसास

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