वफ़ा Poetry (page 57)

एक सर्द जंग है अब मोहब्बतें कहाँ

अासिफ़ जमाल

भूल कर तू सारे ग़म अपने चमन में रक़्स कर

अासिफ़ अंजुम

दे आया अपनी जान भी दरबार-ए-इश्क़ में

अशरफ़ शाद

हर एक रुख़ से मुझे लुत्फ़-ए-जुस्तुजू आए

अशरफ़ रफ़ी

अहद-ए-वफ़ा न याद दिलाएँ तो क्या करें

अशरफ़ रफ़ी

हैफ़ दिल में तिरे वफ़ा न हुई

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

बस-कि दीदार तिरा जल्वा-ए-क़ुद्दूसी है

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ

जो गुज़रती है कहा करता हूँ

अशोक साहनी साहिल

इक लफ़्ज़ याद था मुझे तर्क-ए-वफ़ा मगर

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

हम ने देखा है इतने खंडर ख़्वाब में

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

दिल मानता नहीं है मनाने के बअ'द भी

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

आ जाओ अब तो ज़ुल्फ़ परेशाँ किए हुए

अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन

ज़मीं पर नीम-जाँ यारी पड़ी है

अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी

कहाँ खो गए मेरे ग़म-ख़्वार अब

असग़र शमीम

गुलशन गुलशन शोला-ए-गुल की ज़ुल्फ़-ए-सबा की बात चली

असग़र सलीम

गुलशन गुलशन शो'ला-ए-गुल की ज़ुल्फ़-ए-सबा की बात चली

असग़र सलीम

ग़ुबार सा है सर-ए-शाख़-सार कहते हैं

असग़र सलीम

चेहरों को बे-नक़ाब समझने लगा था मैं

असग़र मेहदी होश

इक उम्र मह-ओ-साल की ठोकर में रहा हूँ

असग़र गोरखपुरी

जो सज़ा दीजे है बजा मुझ को

असर लखनवी

दिल गया बे-क़रारियाँ न गईं

असर लखनवी

भूले अफ़्साने वफ़ा के याद दिल्वाते हुए

असर लखनवी

बहार है तिरे आरिज़ से लौ लगाए हुए

असर लखनवी

आख़िर-ए-कार यही उज़्र जफ़ा का निकला

असर लखनवी

ख़याल यार मुझे जब लहू रुलाने लगा

असद जाफ़री

देखिए अहद-ए-वफ़ा अच्छा नहीं

असद भोपाली

कुछ भी हो वो अब दिल से जुदा हो नहीं सकते

असद भोपाली

ग़म-ए-हयात से जब वास्ता पड़ा होगा

असद भोपाली

दो-जहाँ से मावरा हो जाएगा

असद भोपाली

शौक़ चढ़ती धूप जाता वक़्त घटती छाँव है

आरज़ू लखनवी

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