वफ़ा Poetry (page 56)

ये आग मोहब्बत की बुझाए न बुझे है

असरा रिज़वी

मैं सच तो कह दूँ पर उस को कहीं बुरा न लगे

असरा रिज़वी

हर-चंद बे-नवा है कोरे घड़े का पानी

असलम कोलसरी

कट गईं सारी पतंगें डोर से

असलम हबीब

मैं सोचता हूँ कहीं तू ख़फ़ा न हो जाए

असलम फ़र्रुख़ी

कोशिश है गर उस की कि परेशान करेगा

असलम इमादी

वो नख़्ल जो बार-वर हुए हैं

असलम अंसारी

मुझे तो ये भी फ़रेब-ए-हवास लगता है

असलम अंसारी

लरज़ लरज़ के दिल-ए-ना-तवाँ ठहर ही न जाए

असलम अंसारी

कुछ तो ग़म-ख़ाना-ए-हस्ती में उजाला होता

असलम अंसारी

ख़फ़ा न हो कि तिरा हुस्न ही कुछ ऐसा था

असलम अंसारी

हर शख़्स इस हुजूम में तन्हा दिखाई दे

असलम अंसारी

एक समुंदर एक किनारा एक सितारा काफ़ी है

असलम अंसारी

अपनी सदा की गूँज ही तुझ को डरा न दे

असलम अंसारी

ऐन-मुमकिन है किसी तर्ज़-ए-अदा में आए

असलम अंसारी

अब और चलने का इस दिल में हौसला ही न था

असलम अंसारी

तुम्हारे साथ मिरे मुख़्तलिफ़ मरासिम हैं

आसिम वास्ती

ग़लत-रवी को तिरी मैं ग़लत समझता हूँ

आसिम वास्ती

तुम इंतिज़ार के लम्हे शुमार मत करना

आसिम वास्ती

गुज़र चुका है जो लम्हा वो इर्तिक़ा में है

आसिम वास्ती

जिस दिन से यार मुझ से वो शोख़ आश्ना हुआ

आसिफ़ुद्दौला

दिल दिया जी दिया ख़फ़ा न किया

आसिफ़ुद्दौला

दाम-ए-उल्फ़त में फँसा दिल हाए दिल अफ़्सोस दिल

आसिफ़ुद्दौला

बिस्मिल किसी को रखना रस्म-ए-वफ़ा नहीं है

आसिफ़ुद्दौला

ज़िंदगी में तुझ को पाना आज तक भूला नहीं

अासिफ़ा ज़मानी

ऐ मिरे दिल बता ख़्वाब बुनता है क्यूँ

अासिफ़ा ज़मानी

चंद लम्हे विसाल-मौसम के

अासिफ़ शफ़ी

जमाल-ए-यार को तस्वीर करने वाले थे

अासिफ़ शफ़ी

दिल में वफ़ा की है तलब लब पे सवाल भी नहीं

अासिफ़ शफ़ी

वो बे-हुनर हूँ कि है ज़िंदगी वबाल मुझे

अासिफ़ जमाल

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