ऐन-मुमकिन है किसी तर्ज़-ए-अदा में आए

ऐन-मुमकिन है किसी तर्ज़-ए-अदा में आए

क़िस्सा-ए-दर्द-ए-वफ़ा सौत-ओ-सदा में आए

रुत बदलते ही नए रंग के मंज़र उभरे

कुछ परिंदे भी नई मौज-ए-हवा में आए

हम तो आईना-नुमा थे ही सफ़ा-केशी में

नाम कुछ और भी अर्बाब-ए-सफ़ा में आए

इश्क़ ता-हाल तो मतरूक नहीं हो पाया

इन्क़िलाबात भी गो राह-ए-वफ़ा में आए

कुछ गुल-ए-नीलोफ़री झील की तारीकी से

अपनी दानिस्त में अक़्लीम-ए-बक़ा में आए

क्या कहें उस को तज़ादात-ए-ज़माना के सिवा

कितने दरवेश थे जो शाही क़बा में आए

ख़्वाब आँखों में लिए हम भी ब-ताईद-ए-जुनूँ

कैसे इक जल्वा-गह-ए-ख़्वाब-नुमा में आए

शोरिश-ए-अहद में ये तज़्किरा-ए-इश्क़-ए-वफ़ा

जैसे नग़्मा सा कोई बाँग-ए-दरा में आए

ख़ुद को गुम कर के किसी और के पा लेने तक

मरहले और भी तकमील-ए-अना में आए

(1199) Peoples Rate This


Fatal error: Uncaught PDOException: SQLSTATE[42S22]: Column not found: 1054 Unknown column 'id' in 'ORDER BY' in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php:554 Stack trace: #0 /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php(554): PDOStatement->execute() #1 {main} thrown in /home/darsaal/htdocs/darsaal.com/poetry/poem_hi.php on line 554