याद Poetry (page 88)

गुज़र गई है अभी साअत-ए-गुज़िश्ता भी

अजमल सिराज

दीवार याद आ गई दर याद आ गया

अजमल सिराज

माँ ने लिखा है ख़त में जहाँ जाओ ख़ुश रहो

अजमल अजमली

शहर शहर ढूँड आए दर-ब-दर पुकार आए

अजमल अजमली

दो पल के हैं ये सब मह ओ अख़्तर न भूलना

अजमल अजमली

मय-ख़ाने पर काले बादल जब घिर घिर कर आते हैं

आजिज़ मातवी

जहाँ न दिल को सुकून है न है क़रार मुझे

आजिज़ मातवी

हंगामा क्यूँ बपा है ज़रा बाम पर से देख

आजिज़ मातवी

लब-ए-दरिया जो प्यासे मर गए हैं

अजीत सिंह हसरत

इश्क़ जन्मों का है सफ़र शायद

अजीत सिंह हसरत

हम को याद न आओ अब

अजीत सिंह हसरत

गुज़रे जिधर से नूर बिखेरे चले गए

अजीत सिंह हसरत

इक याद सो रहे को उठाती है आज भी

अजीत सिंह हसरत

धुआँ सिफ़त हूँ ख़लाओं का है सफ़र मुझ को

अजीत सिंह हसरत

वो जो फूल थे तिरी याद के तह-ए-दस्त-ए-ख़ार चले गए

अजय सहाब

मकीनों के तअल्लुक़ ही से याद आती है हर बस्ती

ऐतबार साजिद

न गुमान मौत का है न ख़याल ज़िंदगी का

ऐतबार साजिद

मिरा है कौन दुश्मन मेरी चाहत कौन रखता है

ऐतबार साजिद

ढूँडते क्या हो इन आँखों में कहानी मेरी

ऐतबार साजिद

फिरा किसी का इलाही किसी से यार न हो

ऐश देहलवी

बातें न किस ने हम को कहीं तेरे वास्ते

ऐश देहलवी

अब जुनूँ के रत-जगे ख़िरद में आ गए

ऐनुद्दीन आज़िम

मैं अपना कार-ए-वफ़ा आज़माऊँगा फिर भी

ऐन ताबिश

पुरानी फ़ाइलों में गुनगुनाती शाम

ऐन ताबिश

मैं अल्बम के वरक़ जब भी उलटता हूँ

ऐन ताबिश

इक शहर था इक बाग़ था

ऐन ताबिश

कैसे अफ़्सूँ थे वहाँ कैसे फ़साने थे उधर

ऐन ताबिश

गुज़रते वक़्त को बुनियाद करने वाला हूँ

ऐन ताबिश

बाहम जो हुस्न ओ इश्क़ में याराना हो गया

अहसन मारहरवी

तुझे अपना बनाना चाहता हूँ

अहसन इमाम अहसन

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