Couplets Poetry (page 218)
जब ज़िक्र किया मैं ने कभी वस्ल का उन से
नूह नारवी
जाने को जाए फ़स्ल-ए-गुल आने को आए हर बरस
नूह नारवी
इश्क़ में कुछ नज़र नहीं आया
नूह नारवी
इस कम-सिनी में हो उन्हें मेरा ख़याल क्या
नूह नारवी
हुस्न-ए-मुत्लक़ का निशाँ का'बे में तो मिलता नहीं
नूह नारवी
हम ने ये देख लिया देख लिया देख लिया
नूह नारवी
हम इंतिज़ार करें हम को इतनी ताब नहीं
नूह नारवी
हज़ारों रंज-ए-दिल दे दे के माशूक़ों को झेले हैं
नूह नारवी
हमें इसरार मिलने पर तुम्हें इंकार मिलने से
नूह नारवी
हमारे दिल से क्या अरमान सब इक साथ निकलेंगे
नूह नारवी
ग़ैर का इश्क़ है कि मेरा है
नूह नारवी
फ़ित्ने दबे-दबाए थे जितने पड़े हुए
नूह नारवी
इक सितम ढाने में फ़र्द एक सितम सहने में
नूह नारवी
दूँगा जवाब मैं भी बड़ी शद्द-ओ-मद के साथ
नूह नारवी
दोस्ती को बुरा समझते हैं
नूह नारवी
दिल उन्हें देंगे मगर हम देंगे इन शर्तों के साथ
नूह नारवी
दिल नज़्र करो ज़ुल्म सहो नाज़ उठाओ
नूह नारवी
दिल में घुट घुट कर इन्हें रहते ज़माना हो गया
नूह नारवी
दिल को तुम शौक़ से ले जाओ मगर याद रहे
नूह नारवी
दिल के दो हिस्से जो कर डाले थे हुस्न-ओ-इश्क़ ने
नूह नारवी
दिल जो दे कर किसी काफ़िर को परेशाँ हो जाए
नूह नारवी
दिल अपना कहीं ठहरे तो हम भी कहीं ठहरें
नूह नारवी
दिखाए पाँच आलम इक पयाम-ए-शौक़ ने मुझ को
नूह नारवी
दम जो निकला तो मुद्दआ निकला
नूह नारवी
चलो 'नूह' तुम को दिखा लाएँ तुम ने
नूह नारवी
चाहिए थी शम्अ इस तारीक घर के वास्ते
नूह नारवी
भरी महफ़िल में उन को छेड़ने की क्या ज़रूरत थी
नूह नारवी
बे-वज्ह मोहब्बत से नहीं बोल रहे हैं
नूह नारवी
बरसों रहे हैं आप हमारी निगाह में
नूह नारवी
बरहमन उस के हैं शैख़ उस के हैं राहिब उस के
नूह नारवी