Couplets Poetry (page 220)
सुनाई देती है सात आसमाँ में गूँज अपनी
नोमान शौक़
सुना है शोर से हल होंगे सारे मसअले इक दिन
नोमान शौक़
सारे चक़माक़-बदन आए थे तय्यारी से
नोमान शौक़
सैर-ए-दुनिया को जाते हो जाओ
नोमान शौक़
सब जहाँगीर नियामों से निकल आएँगे
नोमान शौक़
रूह की थाप न रोको कि क़यामत होगी
नोमान शौक़
रोक दो ये रौशनी की तेज़ धार
नोमान शौक़
रो रो के लोग कहते थे जाती रहेगी आँख
नोमान शौक़
रेल देखी है कभी सीने पे चलने वाली
नोमान शौक़
क़ाएदे बाज़ार के इस बार उल्टे हो गए
नोमान शौक़
पूछो कि उस के ज़ेहन में नक़्शा भी है कोई
नोमान शौक़
फूल वो रखता गया और मैं ने रोका तक नहीं
नोमान शौक़
फिर इस मज़ाक़ को जम्हूरियत का नाम दिया
नोमान शौक़
पाँव के नीचे से पहले खींच ली सारी ज़मीं
नोमान शौक़
पहनते ख़ाक हैं ख़ाक ओढ़ते बिछाते हैं
नोमान शौक़
नाम से उस के पुकारूँ ख़ुद को
नोमान शौक़
नाम ही ले ले तुम्हारा कोई
नोमान शौक़
मुझ को भी पहले-पहल अच्छे लगे थे ये गुलाब
नोमान शौक़
मोहब्बत वाले हैं कितने ज़मीं पर
नोमान शौक़
मिरी ख़ुशियों से वो रिश्ता है तुम्हारा अब तक
नोमान शौक़
मिरा कुछ रास्ते में खो गया है
नोमान शौक़
मौसम-ए-वज्द में जा कर मैं कहाँ रक़्स करूँ
नोमान शौक़
मैं ख़ानक़ाह-ए-बदन से उदास लौट आया
नोमान शौक़
मैं अपने साए में बैठा था कितनी सदियों से
नोमान शौक़
मैं अगर तुम को मिला सकता हूँ महर-ओ-माह से
नोमान शौक़
लिपटा भी एक बार तो किस एहतियात से
नोमान शौक़
कुछ न था मेरे पास खोने को
नोमान शौक़
कोई समझाए मिरे मद्दाह को
नोमान शौक़
किसी के साए किसी की तरफ़ लपकते हुए
नोमान शौक़
किनारे पाँव से तलवार कर दी
नोमान शौक़