Couplets Poetry (page 219)
बर्बाद-ए-वफ़ा हो कर मस्जूद-ए-जहाँ दिल हो
नूह नारवी
असीरान-ए-क़फ़स को वास्ता क्या इन झमेलों से
नूह नारवी
अश्कों के टपकने पर तस्दीक़ हुई उस की
नूह नारवी
अल्लाह-रे उन के हुस्न की मोजिज़-नुमाईयाँ
नूह नारवी
ऐ 'नूह' तौबा इश्क़ से कर ली थी आप ने
नूह नारवी
ऐ 'नूह' न तर्क-ए-शाएरी हो
नूह नारवी
ऐ 'नूह' खुल चले थे वो हम से शब-ए-विसाल
नूह नारवी
ऐ 'नूह' आते जाते हैं दोनों घरों में हम
नूह नारवी
ऐ दैर-ओ-हरम वालो तुम दिल की तरफ़ देखो
नूह नारवी
अदा आई जफ़ा आई ग़ुरूर आया हिजाब आया
नूह नारवी
अच्छे बुरे को वो अभी पहचानते नहीं
नूह नारवी
अभी उस क़यामत को मैं क्या कहूँ
नूह नारवी
आते आते राह पर वो आएँगे
नूह नारवी
आप जो कहते हैं सब हज़रत-ए-नासेह है बजा
नूह नारवी
आप आए बन पड़ी मेरे दिल-ए-नाशाद की
नूह नारवी
आज आएँगे कल आएँगे कल आएँगे आज आएँगे
नूह नारवी
तू अगर अब्र है मैं अब्र में पानी की तरह
नोमान इमाम
इक सानेहा सा दफ़्न हूँ लेकिन कभी कभी
नोमान इमाम
ज़रा ये हाथ मेरे हाथ में दो
नोमान शौक़
ये ख़्वाब कौन दिखाने लगा तरक़्क़ी के
नोमान शौक़
वो तो कहिए आप की ख़ुशबू ने पहचाना मुझे
नोमान शौक़
वो तंज़ को भी हुस्न-ए-तलब जान ख़ुश हुए
नोमान शौक़
वो साँप जिस ने मुझे आज तक डसा भी नहीं
नोमान शौक़
वो मेरे लम्स से महताब बन चुका होता
नोमान शौक़
उस ने हँस कर हाथ छुड़ाया है अपना
नोमान शौक़
उस का मिलना कोई मज़ाक़ है क्या
नोमान शौक़
तुम तो सर्दी की हसीं धूप का चेहरा हो जिसे
नोमान शौक़
तिरे बग़ैर कोई और इश्क़ हो कैसे
नोमान शौक़
तौक़-ए-बदन उतार के फेंका ज़मीं से दूर
नोमान शौक़
तबाह कर तो दूँ ज़ाहिर-परस्त दुनिया को
नोमान शौक़