Couplets Poetry (page 216)

ये सर्दियों का उदास मौसम कि धड़कनें बर्फ़ हो गई हैं

नोशी गिलानी

ये आरज़ू थी कि हम उस के साथ साथ चलें

नोशी गिलानी

उसे लाख दिल से पुकार लो उसे देख लो

नोशी गिलानी

उस शहर में कितने चेहरे थे कुछ याद नहीं सब भूल गए

नोशी गिलानी

तुझ से अब और मोहब्बत नहीं की जा सकती

नोशी गिलानी

तितलियाँ जुगनू सभी होंगे मगर देखेगा कौन

नोशी गिलानी

मैं तन्हा लड़की दयार-ए-शब में जलाऊँ सच के दिए कहाँ तक

नोशी गिलानी

मैं फ़ैसले की घड़ी से गुज़र चुकी हूँ मगर

नोशी गिलानी

कुछ नहीं चाहिए तुझ से ऐ मिरी उम्र-ए-रवाँ

नोशी गिलानी

किसी हर्फ़ में किसी बाब में नहीं आएगा

नोशी गिलानी

जलाए रक्खूँ-गी सुब्ह तक मैं तुम्हारे रस्तों में अपनी आँखें

नोशी गिलानी

दिल का क्या है दिल ने कितने मंज़र देखे लेकिन

नोशी गिलानी

परिंदों में तो ये फ़िरक़ा-परस्ती भी नहीं देखी

नूर तक़ी नूर

कौन तन्हाई का एहसास दिलाता है मुझे

नूर जहाँ सरवत

वही मंज़िलें वही दश्त ओ दर तिरे दिल-ज़दों के हैं राहबर

नून मीम राशिद

पिला साक़िया मय-ए-जाँ पिला कि मैं लाऊँ फिर ख़बर-ए-जुनूँ

नून मीम राशिद

ग़म-ए-आशिक़ी में गिरह-कुशा न ख़िरद हुई न जुनूँ हुआ

नून मीम राशिद

ये भी तो जब्र-ए-वक़्त है तू मुझे याद भी नहीं

नून मीम दनिश

गर्दिश-ए-माह-ओ-साल से आगे निकल गया हूँ मैं

नून मीम दनिश

दिन तो ख़ैर गुज़र जाता है

नून मीम दनिश

ये मेरे पास जो चुप-चाप आए बैठे हैं

नूह नारवी

वो ख़ुदाई कर रहे थे जब ख़ुदा होने से क़ब्ल

नूह नारवी

वो ख़ुदा जाने घर में हैं कि नहीं

नूह नारवी

वो हाथ में तलवार लिए सर पे खड़े हैं

नूह नारवी

वो घर से चले राह में रुक गए

नूह नारवी

वो बात क्या जो और की तहरीक से हुई

नूह नारवी

उन से सब हाल दग़ाबाज़ कहे देते हैं

नूह नारवी

उन का वा'दा उन का पैमाँ उन का इक़रार उन का क़ौल

नूह नारवी

तुम्हारी शोख़-नज़र इक जगह कभी न रही

नूह नारवी

तासीर के दो हिस्से अगर हों तो मज़ा है

नूह नारवी