Couplets Poetry (page 215)

ज़िंदगी परछाइयाँ अपनी लिए

नुशूर वाहिदी

ज़माना याद करे या सबा करे ख़ामोश

नुशूर वाहिदी

यही काँटे तो कुछ ख़ुद्दार हैं सेहन-ए-गुलिस्ताँ में

नुशूर वाहिदी

उसी को ज़िंदगी का साज़ दे के मुतमइन हूँ मैं

नुशूर वाहिदी

तारीख़-ए-जुनूँ ये है कि हर दौर-ए-ख़िरद में

नुशूर वाहिदी

सरक कर आ गईं ज़ुल्फ़ें जो इन मख़मूर आँखों तक

नुशूर वाहिदी

सलीक़ा जिन को होता है ग़म-ए-दौराँ में जीने का

नुशूर वाहिदी

क़दम मय-ख़ाना में रखना भी कार-ए-पुख़्ता-काराँ है

नुशूर वाहिदी

'नुशूर' आलूदा-ए-इस्याँ सही पर कौन बाक़ी है

नुशूर वाहिदी

मेरी आँखों में हैं आँसू तेरे दामन में बहार

नुशूर वाहिदी

मैं तिनकों का दामन पकड़ता नहीं हूँ

नुशूर वाहिदी

मैं अभी से किस तरह उन को बेवफ़ा कहूँ

नुशूर वाहिदी

मआज़-अल्लाह मय-ख़ाने के औराद-ए-सहर-गाही

नुशूर वाहिदी

किस बेबसी के साथ बसर कर रहा है उम्र

नुशूर वाहिदी

ख़ाक और ख़ून से इक शम्अ जलाई है 'नुशूर'

नुशूर वाहिदी

हम ने भी निगाहों से उन्हें छू ही लिया है

नुशूर वाहिदी

हम रिवायात को पिघला के 'नुशूर'

नुशूर वाहिदी

हज़ार शम्अ फ़रोज़ाँ हो रौशनी के लिए

नुशूर वाहिदी

हस्ती का नज़ारा क्या कहिए मरता है कोई जीता है कोई

नुशूर वाहिदी

हक़ीक़त जिस जगह होती है ताबानी बताती है

नुशूर वाहिदी

है शाम अभी क्या है बहकी हुई बातें हैं

नुशूर वाहिदी

गुनाहगार तो रहमत को मुँह दिखा न सका

नुशूर वाहिदी

एक रिश्ता भी मोहब्बत का अगर टूट गया

नुशूर वाहिदी

इक नज़र का फ़साना है दुनिया

नुशूर वाहिदी

दुनिया की बहारों से आँखें यूँ फेर लीं जाने वालों ने

नुशूर वाहिदी

दिया ख़ामोश है लेकिन किसी का दिल तो जलता है

नुशूर वाहिदी

दौलत का फ़लक तोड़ के आलम की जबीं पर

नुशूर वाहिदी

बड़ी हसरत से इंसाँ बचपने को याद करता है

नुशूर वाहिदी

अंजाम-ए-वफ़ा ये है जिस ने भी मोहब्बत की

नुशूर वाहिदी

अग़्यार को गुल-पैरहनी हम ने अता की

नुशूर वाहिदी