Bewafa Poetry (page 9)

ज़ुल्मत को ज़िया सरसर को सबा बंदे को ख़ुदा क्या लिखना

हबीब जालिब

उट्ठो मरने का हक़ इस्तिमाल करो

हबीब जालिब

तेज़ चलो

हबीब जालिब

शहर-ए-ज़ुल्मात को सबात नहीं

हबीब जालिब

सहाफ़ी से

हबीब जालिब

मीरा-जी

हबीब जालिब

मेरी बच्ची

हबीब जालिब

माँ

हबीब जालिब

ख़ुदा हमारा है

हबीब जालिब

औरत

हबीब जालिब

ऐ जहाँ देख ले!

हबीब जालिब

अहद-ए-सज़ा

हबीब जालिब

उस रऊनत से वो जीते हैं कि मरना ही नहीं

हबीब जालिब

तिरे माथे पे जब तक बल रहा है

हबीब जालिब

'मीर'-ओ-'ग़ालिब' बने 'यगाना' बने

हबीब जालिब

लोग गीतों का नगर याद आया

हबीब जालिब

क्या क्या लोग गुज़र जाते हैं रंग-बिरंगी कारों में

हबीब जालिब

कराहते हुए इंसान की सदा हम हैं

हबीब जालिब

कहीं आह बन के लब पर तिरा नाम आ न जाए

हबीब जालिब

'फ़ैज़' और 'फ़ैज़' का ग़म भूलने वाला है कहीं

हबीब जालिब

चूर था ज़ख़्मों से दिल ज़ख़्मी जिगर भी हो गया

हबीब जालिब

बातें तो कुछ ऐसी हैं कि ख़ुद से भी न की जाएँ

हबीब जालिब

सब में हूँ फिर किसी से सरोकार भी नहीं

हबीब मूसवी

जबीन पर क्यूँ शिकन है ऐ जान मुँह है ग़ुस्से से लाल कैसा

हबीब मूसवी

हुए ख़ल्क़ जब से जहाँ में हम हवस-ए-नज़ारा-ए-यार है

हबीब मूसवी

है नौ-जवानी में ज़ोफ़-ए-पीरी बदन में रअशा कमर में ख़म है

हबीब मूसवी

फ़लक की गर्दिशें ऐसी नहीं जिन में क़दम ठहरे

हबीब मूसवी

वो करम हो कि सितम एक तअल्लुक़ है ज़रूर

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

ये ग़म नहीं है कि अब आह-ए-ना-रसा भी नहीं

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

नवेद-ए-आमद-ए-फ़स्ल-ए-बहार भी तो नहीं

हबीब अहमद सिद्दीक़ी