Bewafa Poetry (page 10)

मुझ को दिमाग़-ए-शेवन-ओ-आह-ओ-फ़ुग़ाँ नहीं

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

और ऐ चश्म-ए-तरब बादा-ए-गुलफ़ाम अभी

हबीब अहमद सिद्दीक़ी

हैं धब्बे तेग़-ए-क़ातिल के जिसे धोने नहीं देते

हबीब आरवी

पुराने पेड़ को मौसम नई क़बाएँ दे

गुलज़ार वफ़ा चौदरी

उस सितमगर की मेहरबानी से

गुलज़ार देहलवी

वफ़ा की तश्हीर करने वाला फ़रेब-गर है सितम तो ये है

गुलज़ार बुख़ारी

तिनका तिनका काँटे तोड़े सारी रात कटाई की

गुलज़ार

टुक देखियो ये अबरू-ए-ख़मदार वही है

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

इश्क़ अहद-ए-बेवफ़ा में बे-नवा हो जाएगा

ग़ुलाम नबी आवान

मिले भी दोस्त तो इस तर्ज़-ए-बे-दिली से मिले

गुलाम जीलानी असग़र

जफ़ा-ए-दिल-शिकन

ग़ुलाम दस्तगीर मुबीन

वक़ार दे के कभी बे-वक़ार मत करना

गुहर खैराबादी

तोड़ कर शीशा-ए-दिल को मिरे बर्बाद न कर

गुहर खैराबादी

हवा के हाथ में ख़ंजर है और सब चुप हैं

गोविन्द गुलशन

दिल में ये एक डर है बराबर बना हुआ

गोविन्द गुलशन

नज़्म

गोपाल मित्तल

तेरी आँखों में जो नशा है पज़ीराई का

गोपाल मित्तल

मुझ पे तू मेहरबान है प्यारे

गोपाल मित्तल

इक छेड़ थी जफ़ाओं का तेरी गिला न था

गोपाल मित्तल

यास की बदली यूँ दिल पर छा गई

गोपाल कृष्णा शफ़क़

क्या बताऊँ आज वो मुझ से जुदा क्यूँकर हुआ

गोपाल कृष्णा शफ़क़

लब पे सुर्ख़ी की जगह जो मुस्कुराहट मल रहे हैं

ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर

तू है हरजाई तो अपना भी यही तौर सही

ग़ुलाम मौला क़लक़

फ़िक्र-ए-सितम में आप भी पाबंद हो गए

ग़ुलाम मौला क़लक़

ज़िंदगी मर्ग की मोहलत ही सही

ग़ुलाम मौला क़लक़

तुझे कल ही से नहीं बे-कली न कुछ आज ही से रहा क़लक़

ग़ुलाम मौला क़लक़

तेरे वादे का इख़्तिताम नहीं

ग़ुलाम मौला क़लक़

न रहा शिकवा-ए-जफ़ा न रहा

ग़ुलाम मौला क़लक़

कोई कैसा ही साबित हो तबीअ'त आ ही जाती है

ग़ुलाम मौला क़लक़

किस क़दर दिलरुबा-नुमा है दिल

ग़ुलाम मौला क़लक़