Bewafa Poetry (page 8)

सुन के मेरे इश्क़ की रूदाद को

हफ़ीज़ जौनपुरी

क़ासिद ख़िलाफ़-ए-ख़त कहीं तेरा बयाँ न हो

हफ़ीज़ जौनपुरी

पी हम ने बहुत शराब तौबा

हफ़ीज़ जौनपुरी

जान ही जाए तो जाए दर्द-ए-दिल

हफ़ीज़ जौनपुरी

दीवाने हुए सहरा में फिरे ये हाल तुम्हारे ग़म ने किया

हफ़ीज़ जौनपुरी

वफ़ा जिस से की बेवफ़ा हो गया

हफ़ीज़ जालंधरी

अभी मीआद बाक़ी है सितम की

हफ़ीज़ जालंधरी

ज़िंदगी का लुत्फ़ भी आ जाएगा

हफ़ीज़ जालंधरी

दिल-ए-बे-मुद्दआ है और मैं हूँ

हफ़ीज़ जालंधरी

दिल अभी तक जवान है प्यारे

हफ़ीज़ जालंधरी

आख़िर एक दिन शाद करोगे

हफ़ीज़ जालंधरी

मोहब्बत करने वाले कम न होंगे

हफ़ीज़ होशियारपुरी

कुछ इस तरह से नज़र से गुज़र गया कोई

हफ़ीज़ होशियारपुरी

कुछ इस तरह से नज़र से गुज़र गया कोई

हफ़ीज़ होशियारपुरी

तेज़ जब ख़ंजर-ए-बेदाद किया जाएगा

हफ़ीज़ बनारसी

लहू की मय बनाई दिल का पैमाना बना डाला

हफ़ीज़ बनारसी

जो ख़त है शिकस्ता है जो अक्स है टूटा है

हफ़ीज़ बनारसी

जब भी तिरी यादों की चलने लगी पुर्वाई

हफ़ीज़ बनारसी

इश्क़ में हर नफ़स इबादत है

हफ़ीज़ बनारसी

हदीस-ए-तल्ख़ी-ए-अय्याम से तकलीफ़ होती है

हफ़ीज़ बनारसी

दिल की आवाज़ में आवाज़ मिलाते रहिए

हफ़ीज़ बनारसी

दिल की आवाज़ में आवाज़ मिलाते रहिए

हफ़ीज़ बनारसी

लुत्फ़-ए-जफ़ा इसी में है याद-ए-जफ़ा न आए फिर

हादी मछलीशहरी

बेदर्द मुझ से शरह-ए-ग़म-ए-ज़िंदगी न पूछ

हादी मछलीशहरी

ज़बाँ पे हर्फ़-ए-शिकायत अरे मआज़-अल्लाह

हादी मछलीशहरी

उस बेवफ़ा की बज़्म से चश्म-ए-ख़याल में

हादी मछलीशहरी

महव-ए-कमाल-ए-आरज़ू मुझ को बना के भूल जा

हादी मछलीशहरी

नीला आसमान

हबीब तनवीर

ख़लिश-ओ-सोज़ दिल-फ़िगार ही दी

हबीब तनवीर

उस सितमगर की हक़ीक़त हम पे ज़ाहिर हो गई

हबीब जालिब