Friendship Poetry (page 25)
'फ़ैज़' और 'फ़ैज़' का ग़म भूलने वाला है कहीं
हबीब जालिब
इक शख़्स बा-ज़मीर मिरा यार 'मुसहफ़ी'
हबीब जालिब
दिल-ए-पुर-शौक़ को पहलू में दबाए रक्खा
हबीब जालिब
दिल पर जो ज़ख़्म हैं वो दिखाएँ किसी को क्या
हबीब जालिब
शब को नाला जो मिरा ता-ब-फ़लक जाता है
हबीब मूसवी
सब में हूँ फिर किसी से सरोकार भी नहीं
हबीब मूसवी
रोना इन का काम है हर दम जल जल कर मर जाना भी
हबीब मूसवी
किसी की जुब्बा-साई से कभी घिसता नहीं पत्थर
हबीब मूसवी
जब शाम हुई दिल घबराया लोग उठ के बराए सैर चले
हबीब मूसवी
हुए ख़ल्क़ जब से जहाँ में हम हवस-ए-नज़ारा-ए-यार है
हबीब मूसवी
है निगहबाँ रुख़ का ख़ाल-रू-ए-दोस्त
हबीब मूसवी
है नौ-जवानी में ज़ोफ़-ए-पीरी बदन में रअशा कमर में ख़म है
हबीब मूसवी
गुलों का दौर है बुलबुल मज़े बहार में लूट
हबीब मूसवी
फ़िराक़ में दम उलझ रहा है ख़याल-ए-गेसू में जांकनी है
हबीब मूसवी
देख लो तुम ख़ू-ए-आतिश ऐ क़मर शीशे में है
हबीब मूसवी
दाग़-ए-दिल हैं ग़ैरत-ए-सद-लाला-ज़ार अब के बरस
हबीब मूसवी
चल नहीं सकते वहाँ ज़ेहन-ए-रसा के जोड़-तोड़
हबीब मूसवी
लू हो सबा हो या पुर्वाई सब के साथ चलो
हबीब फख़री
पहलू में इक नई सी ख़लिश पा रहा हूँ मैं
हबीब अशअर देहलवी
अब बहुत दूर नहीं मंज़िल-ए-दोस्त
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
आश्ना जब तक न था उस की निगाह-ए-लुत्फ़ से
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
ये ग़म नहीं है कि अब आह-ए-ना-रसा भी नहीं
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
नवेद-ए-आमद-ए-फ़स्ल-ए-बहार भी तो नहीं
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
कुछ भी दुश्वार नहीं अज़्म-ए-जवाँ के आगे
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
ख़िज़ाँ-नसीब की हसरत ब-रू-ए-कार न हो
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
दुनिया को रू-शनास-ए-हक़ीक़त न कर सके
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
और ऐ चश्म-ए-तरब बादा-ए-गुलफ़ाम अभी
हबीब अहमद सिद्दीक़ी
हैं धब्बे तेग़-ए-क़ातिल के जिसे धोने नहीं देते
हबीब आरवी
चाहते भी हैं चाहते भी नहीं
हबाब तिर्मिज़ी
ख़ुश-नज़र है न ख़ुश-ख़याल है ये
हबाब तिर्मिज़ी