Friendship Poetry (page 26)

आज उन्हें देख लिया बज़्म में फ़र्ज़ानों की

हबाब तिर्मिज़ी

क्या बताएँ आप से क्या हस्ती-ए-इंसान है

ग्यान चन्द

क्या बताएँ आप से क्या हस्ती-ए-इंसान है

ग्यान चन्द

ये दिल भी दोस्त ज़मीं की तरह

गुलज़ार

फिर वहीं लौट के जाना होगा

गुलज़ार

इमेजेज़

गुलज़ार

गिरहें

गुलज़ार

फूलों की तरह लब खोल कभी

गुलज़ार

हर एक ग़म निचोड़ के हर इक बरस जिए

गुलज़ार

एक परवाज़ दिखाई दी है

गुलज़ार

न साथ देगा कोई राह आश्ना मेरा

गुलनार आफ़रीन

न पूछ ऐ मिरे ग़म-ख़्वार क्या तमन्ना थी

गुलनार आफ़रीन

यार गर पूछे तो कीजे कुछ अर्ज़

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

कभी हाथ भी आएगा यार सच कह

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

हैं शैख़ ओ बरहमन तस्बीह और ज़ुन्नार के बंदे

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

देखना ज़ोर ही गाँठा है दिल-ए-यार से दिल

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

टुक देखियो ये अबरू-ए-ख़मदार वही है

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

मुझ से मुड़ने की नीं किसी रू से

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

महज़ूँ न हो 'हुज़ूर' अब आता है यार अपना

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

जब से गया है वो मिरा ईमान-ए-ज़िंदगी

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

हर शजर के तईं होता है समर से पैवंद

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

गुल-एज़ार और भी यूँ रखते हैं रंग और नमक

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

ग़ैर आए पीछे पा गए मुजरे का बार पहले

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

दिल ब-अज़-काबा है याराँ जुब्बा-साई चाहिए

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

आबरू उल्फ़त में अगर चाहिए

ग़ुलाम यहया हुज़ूर अज़ीमाबादी

मिले भी दोस्त तो इस तर्ज़-ए-बे-दिली से मिले

गुलाम जीलानी असग़र

कुछ तुम्हारी अंजुमन में ऐसे दीवाने भी थे

गुलाम जीलानी असग़र

वक़ार दे के कभी बे-वक़ार मत करना

गुहर खैराबादी

मैं इक मुसाफ़ि-ए-तन्हा मिरा सफ़र तन्हा

गुहर खैराबादी

चराग़ से कभी तारों से रौशनी माँगे

गुहर खैराबादी