Friendship Poetry (page 27)
अपने सिवा नहीं है कोई अपना आश्ना
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
ये इक तेरा जल्वा सनम चार सू है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
उस को मुझ से रुठा दिया किस ने
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
उल्फ़त ये छुपाएँ हम किसी की
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
तुम वफ़ा का एवज़ जफ़ा समझे
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
तकल्लुम जो कोई करता है फ़ानी
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
नीम बिस्मिल की क्या अदा है ये
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
नज़्ज़ारा-ए-रुख़-ए-साक़ी से मुझ को मस्ती है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
क्यूँकर न ख़ुश हो सर मिरा लटक्का के दार में
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
क्या हैं शैदा-ए-क़द्द-ए-यार दरख़्त
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
किस क़दर मुझ को ना-तवानी है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
खोल दी है ज़ुल्फ़ किस ने फूल से रुख़्सार पर
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
दुआएँ माँगीं हैं मुद्दतों तक झुका के सर हाथ उठा उठा कर
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
भूला है बा'द-ए-मर्ग मुझे दोस्त याँ तलक
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
अपना हर उज़्व चश्म-ए-बीना है
गोया फ़क़ीर मोहम्मद
सुब्ह-ए-काज़िब
गोपाल मित्तल
शब-ताब
गोपाल मित्तल
रंगीनी-ए-हवस का वफ़ा नाम रख दिया
गोपाल मित्तल
दौर-ए-फ़लक के शिकवे गिले रोज़गार के
गोपाल मित्तल
क्या बताऊँ आज वो मुझ से जुदा क्यूँकर हुआ
गोपाल कृष्णा शफ़क़
तेरे मेरे ख़्वाब जुदा
गिरिजा व्यास
इक तू ही बर्बाद नहीं
गिरिजा व्यास
यारों ने मेरी राह में दीवार खींच कर
ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
पस्त-ओ-बुलंद में जो तुझे रिश्ता चाहिए
ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
नहीं है बहर-ओ-बर में ऐसा मेरे यार कोई
ग़ुलाम मुर्तज़ा राही
मुझ को ग़रीब और क़रज़-दार देख कर
ग़ुलाम मोहम्मद वामिक़
गुलाबों के नशेमन से मिरे महबूब के सर तक
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
ये जहाँ-नवर्द की दास्ताँ ये फ़साना डोलते साए का
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
कश्ती भी नहीं बदली दरिया भी नहीं बदला
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
हर एक पल की उदासी को जानता है तो आ
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर