Friendship Poetry (page 28)
गुलाबों के नशेमन से मिरे महबूब के सर तक
ग़ुलाम मोहम्मद क़ासिर
ख़ुद को कभी न देखा आईने ही को देखा
ग़ुलाम मौला क़लक़
दयार-ए-यार का शायद सुराग़ लग जाता
ग़ुलाम मौला क़लक़
ज़िंदगी मर्ग की मोहलत ही सही
ग़ुलाम मौला क़लक़
उठने में दर्द-ए-मुत्तसिल हूँ मैं
ग़ुलाम मौला क़लक़
उन से कहा कि सिद्क़-ए-मोहब्बत मगर दरोग़
ग़ुलाम मौला क़लक़
उड़ाऊँ न क्यूँ तार-तार-ए-गरेबाँ
ग़ुलाम मौला क़लक़
तेरे दर पर मक़ाम रखते हैं
ग़ुलाम मौला क़लक़
राज़-ए-दिल दोस्त को सुना बैठे
ग़ुलाम मौला क़लक़
न रहा शिकवा-ए-जफ़ा न रहा
ग़ुलाम मौला क़लक़
मातम-ए-दीद है दीदार का ख़्वाहाँ होना
ग़ुलाम मौला क़लक़
क्या आ के जहाँ में कर गए हम
ग़ुलाम मौला क़लक़
कोई कैसा ही साबित हो तबीअ'त आ ही जाती है
ग़ुलाम मौला क़लक़
किस क़दर दिलरुबा-नुमा है दिल
ग़ुलाम मौला क़लक़
ख़ुशी में भी नवा-संज-ए-फ़ुग़ाँ हूँ
ग़ुलाम मौला क़लक़
जौहर-ए-आसमाँ से क्या न हुआ
ग़ुलाम मौला क़लक़
हर अदावत की इब्तिदा है इश्क़
ग़ुलाम मौला क़लक़
है ख़मोशी-ए-इंतिज़ार बला
ग़ुलाम मौला क़लक़
दोस्ती उस की दुश्मनी ही सही
ग़ुलाम मौला क़लक़
दिल के हर जुज़्व में जुदाई है
ग़ुलाम मौला क़लक़
चल दिए हम ऐ ग़म-ए-आलम विदाअ'
ग़ुलाम मौला क़लक़
ऐ सितम-आज़मा जफ़ा कब तक
ग़ुलाम मौला क़लक़
ऐ ख़ार ख़ार-ए-हसरत क्या क्या फ़िगार हैं हम
ग़ुलाम मौला क़लक़
आप के महरम असरार थे अग़्यार कि हम
ग़ुलाम मौला क़लक़
आए क्या तेरा तसव्वुर ध्यान में
ग़ुलाम मौला क़लक़
ये सच है मिल बैठने की हद तक तो काम आई है ख़ुश-गुमानी
ग़ुलाम हुसैन साजिद
रुका हूँ किस के वहम में मिरे गुमान में नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
हुदूद-ए-क़र्या-ए-वहम-ओ-गुमाँ में कोई नहीं
ग़ुलाम हुसैन साजिद
चराग़ की ओट में है मेहराब पर सितारा
ग़ुलाम हुसैन साजिद
अगर ये रंगीनी-ए-जहाँ का वजूद है अक्स-ए-आसमाँ से
ग़ुलाम हुसैन साजिद