Friendship Poetry (page 32)
गर तुझ को है यक़ीन-ए-इजाबत दुआ न माँग
ग़ालिब
गर न अंदोह-ए-शब-ए-फ़ुर्क़त बयाँ हो जाएगा
ग़ालिब
गई वो बात कि हो गुफ़्तुगू तो क्यूँकर हो
ग़ालिब
एक एक क़तरे का मुझे देना पड़ा हिसाब
ग़ालिब
दोस्त ग़म-ख़्वारी में मेरी सई फ़रमावेंगे क्या
ग़ालिब
दिया है दिल अगर उस को बशर है क्या कहिए
ग़ालिब
दीवानगी से दोश पे ज़ुन्नार भी नहीं
ग़ालिब
दिल से तिरी निगाह जिगर तक उतर गई
ग़ालिब
दिल मिरा सोज़-ए-निहाँ से बे-मुहाबा जल गया
ग़ालिब
धमकी में मर गया जो न बाब-ए-नबर्द था
ग़ालिब
देख कर दर-पर्दा गर्म-ए-दामन-अफ़्शानी मुझे
ग़ालिब
दर्द से मेरे है तुझ को बे-क़रारी हाए हाए
ग़ालिब
दहर में नक़्श-ए-वफ़ा वजह-ए-तसल्ली न हुआ
ग़ालिब
चाहिए अच्छों को जितना चाहिए
ग़ालिब
बिसात-ए-इज्ज़ में था एक दिल यक क़तरा ख़ूँ वो भी
ग़ालिब
बज़्म-ए-शाहंशाह में अशआर का दफ़्तर खुला
ग़ालिब
बाज़ीचा-ए-अतफ़ाल है दुनिया मिरे आगे
ग़ालिब
बर्शिकाल-ए-गिर्या-ए-आशिक़ है देखा चाहिए
ग़ालिब
बला से हैं जो ये पेश-ए-नज़र दर-ओ-दीवार
ग़ालिब
अर्ज़-ए-नाज़-ए-शोख़ी-ए-दंदाँ बराए-ख़ंदा है
ग़ालिब
आमद-ए-ख़त से हुआ है सर्द जो बाज़ार-ए-दोस्त
ग़ालिब
इक ख़याल-ओ-ख़्वाब है ए 'शोर' ये बज़्म-ए-जहाँ
जोर्ज पेश शोर
इक साया-ए-शाम याद आया
गौहर होशियारपुरी
दरिया में ये नाव किस तरफ़ है
गौहर होशियारपुरी
बज़्म-ए-याराँ है ये साक़ी मय नहीं तो ग़म न कर
गणेश बिहारी तर्ज़
माहौल साज़गार करो मैं नशे में हूँ
गणेश बिहारी तर्ज़
कितने जुमले हैं कि जो रू-पोश हैं यारों के बीच
गणेश बिहारी तर्ज़
दोस्ती अपनी जगह और दुश्मनी अपनी जगह
गणेश बिहारी तर्ज़
दोस्ती अपनी जगह और दुश्मनी अपनी जगह
गणेश बिहारी तर्ज़
कुत्तों का मुशाएरा
फ़ुर्क़त काकोरवी