Friendship Poetry (page 33)
ये जो दुश्मन ग़म-ए-निहानी है
फ्रांस गॉड्लिब क्वीन फ़्रेस्को
मेहनत-ओ-दर्द-ओ-रंज-ओ-ग़म और अलम ये रात दिन
फ्रांस गॉड्लिब क्वीन फ़्रेस्को
ये नहीं कसरत-ए-आलाम से जल जाते हैं
फ़ितरत अंसारी
नए जहाँ में पुरानी शराब ले आए
फ़ितरत अंसारी
हुस्न-ए-फ़ितरत के अमीं क़ातिल-ए-किरदार न बन
फ़ितरत अंसारी
हो गए यार पराए अपने
फ़ीरोज़ा ख़ुसरो
अब नहीं कोई ठिकाना अपना
फ़ीरोज़ा ख़ुसरो
फिर कभी ये ख़ता नहीं करना
फ़िरदौस गयावी
अब क्या बताऊँ शहर ये कैसा लगा मुझे
फ़िरदौस गयावी
ज़िंदगी क्या है आज इसे ऐ दोस्त
फ़िराक़ गोरखपुरी
ज़रा विसाल के बाद आइना तो देख ऐ दोस्त
फ़िराक़ गोरखपुरी
ये ज़िल्लत-ए-इश्क़ तेरे हाथों
फ़िराक़ गोरखपुरी
मैं मुद्दतों जिया हूँ किसी दोस्त के बग़ैर
फ़िराक़ गोरखपुरी
ग़रज़ कि काट दिए ज़िंदगी के दिन ऐ दोस्त
फ़िराक़ गोरखपुरी
दिल-दुखे रोए हैं शायद इस जगह ऐ कू-ए-दोस्त
फ़िराक़ गोरखपुरी
बद-गुमाँ हो के मिल ऐ दोस्त जो मिलना है तुझे
फ़िराक़ गोरखपुरी
अब याद-ए-रफ़्तगाँ की भी हिम्मत नहीं रही
फ़िराक़ गोरखपुरी
शाम-ए-अयादत
फ़िराक़ गोरखपुरी
परछाइयाँ
फ़िराक़ गोरखपुरी
जुगनू
फ़िराक़ गोरखपुरी
जुदाई
फ़िराक़ गोरखपुरी
हिण्डोला
फ़िराक़ गोरखपुरी
वक़्त-ए-ग़ुरूब आज करामात हो गई
फ़िराक़ गोरखपुरी
तूर था का'बा था दिल था जल्वा-ज़ार-ए-यार था
फ़िराक़ गोरखपुरी
तुम्हें क्यूँकर बताएँ ज़िंदगी को क्या समझते हैं
फ़िराक़ गोरखपुरी
तेज़ एहसास-ए-ख़ुदी दरकार है
फ़िराक़ गोरखपुरी
सितारों से उलझता जा रहा हूँ
फ़िराक़ गोरखपुरी
शाम-ए-ग़म कुछ उस निगाह-ए-नाज़ की बातें करो
फ़िराक़ गोरखपुरी
सर में सौदा भी नहीं दिल में तमन्ना भी नहीं
फ़िराक़ गोरखपुरी
रस्म-ओ-राह-ए-दहर क्या जोश-ए-मोहब्बत भी तो हो
फ़िराक़ गोरखपुरी