Friendship Poetry (page 61)
किसी ने भेजा है ख़त प्यार और वफ़ा लिख कर
अतीक़ अंज़र
जिस की ख़ातिर मैं ने दुनिया की तरफ़ देखा न था
अतीक़ अंज़र
मैं अपनी ख़ाक को जब आइना बनाता हूँ
अतीक़ अहमद
खिले हैं फूल उसी रंग की सताइश में
अतीक़ अहमद
वक़्त ने लूटे हैं हस्ती के ख़ज़ाने कितने
अतीब एजाज़
दिल की दहलीज़ पे दिलबर आया
अतीब एजाज़
तिलिस्म-ए-शब से बहुत बे-ख़बर चले आए
अताउर्रहमान क़ाज़ी
कुछ ख़्वाब कुछ ख़याल में मस्तूर हो गए
अताउर्रहमान जमील
वैसे तो इस घर को उस ने चाहे कम ख़ुश-हाली दी
अताउल हसन
किसी और को मैं तिरे सिवा नहीं चाहता
अताउल हसन
पारसाओं ने बड़े ज़र्फ़ का इज़हार किया
अता शाद
ख़्वाब की दिल्ली
अता आबिदी
तुझ को ख़िफ़्फ़त से बचा लूँ पानी
अता आबिदी
तीरगी शम्अ बनी राहगुज़र में आई
अता आबिदी
उन का जश्न-ए-साल-गिरह
असरार-उल-हक़ मजाज़
तआरुफ़
असरार-उल-हक़ मजाज़
शरारे
असरार-उल-हक़ मजाज़
नौ-जवान से
असरार-उल-हक़ मजाज़
ख़ाना-ब-दोश
असरार-उल-हक़ मजाज़
इंक़लाब
असरार-उल-हक़ मजाज़
फ़िक्र
असरार-उल-हक़ मजाज़
एक जिला-वतन की वापसी
असरार-उल-हक़ मजाज़
इलाहाबाद से
असरार-उल-हक़ मजाज़
आवारा
असरार-उल-हक़ मजाज़
आज भी
असरार-उल-हक़ मजाज़
आहंग-ए-नौ
असरार-उल-हक़ मजाज़
यूँही बैठे रहो बस दर्द-ए-दिल से बे-ख़बर हो कर
असरार-उल-हक़ मजाज़
तस्कीन-ए-दिल-ए-महज़ूँ न हुई वो सई-ए-करम फ़रमा भी गए
असरार-उल-हक़ मजाज़
रह-ए-शौक़ से अब हटा चाहता हूँ
असरार-उल-हक़ मजाज़
इज़्न-ए-ख़िराम लेते हुए आसमाँ से हम
असरार-उल-हक़ मजाज़