Friendship Poetry (page 63)

वक़्त बे-वक़्त ये पोशाक मिरी ताक में है

आसिम वास्ती

सीने में दाग़ है तपिश-ए-इंतिज़ार का

आसिफ़ुद्दौला

शक्ल उस की किसी सूरत से जो दिखलाए हमें

आसिफ़ुद्दौला

पूछते क्या हो मिरे तुम दिल-ए-दीवाने से

आसिफ़ुद्दौला

मिलने को तुझ से दिल तो मिरा बे-क़रार है

आसिफ़ुद्दौला

किस क़दर दर्द के शब करता था मज़कूर तिरा

आसिफ़ुद्दौला

जिस घड़ी तेरे आस्ताँ से गए

आसिफ़ुद्दौला

जिस दिन से यार मुझ से वो शोख़ आश्ना हुआ

आसिफ़ुद्दौला

जब से मेरे दिल में आ कर इश्क़ का थाना हुआ

आसिफ़ुद्दौला

हम ने क़िस्सा बहुत कहा दिल का

आसिफ़ुद्दौला

ग़ैर पर लुत्फ़ करे हम पे सितम या क़िस्मत

आसिफ़ुद्दौला

दिल दिया जी दिया ख़फ़ा न किया

आसिफ़ुद्दौला

आँखों से अपनी 'आसिफ़' तू एहतिराज़ करना

आसिफ़ुद्दौला

बाज़ चेहरे बहुत हसीन सही

अासिफ़ा निशात

क्या ज़रूरी है शाएरी की जाए

अासिफ़ा निशात

जमाल-ए-यार को तस्वीर करने वाले थे

अासिफ़ शफ़ी

जहान-ए-हुस्न-ओ-नज़र से किनारा करना है

अासिफ़ शफ़ी

दिल में वफ़ा की है तलब लब पे सवाल भी नहीं

अासिफ़ शफ़ी

ग़ज़ल में दर्द का जादू मुझी को होना था

अासिफ़ साक़िब

अजनबी मुझ से आ गले मिल ले

आसिफ़ रज़ा

तज़लील

आसिफ़ रज़ा

मक़्सूद-अली-'दीवाना'

आसिफ़ रज़ा

जुर्म

आसिफ़ रज़ा

साहिल-ए-इंतिज़ार में तन्हा

आसिफ़ रज़ा

मगर नहीं था फ़क़त 'मीर' ख़्वार मैं भी था

अासिफ़ जमाल

भूले हुए हैं सब कि है कार-ए-जहाँ बहुत

अासिफ़ जमाल

सदा-ए-क़ैस शौक़-ए-दश्त-पैमाई नमी-दानम

अासिफ़ अंजुम

जो ज़िंदगी बची है उसे ख़ार क्या करें

अशरफ़ शाद

पर्दे मिरी निगाह के भी दरमियाँ न थे

अशरफ़ रफ़ी

इस जौर ओ जफ़ा से तिरे ज़िन्हार न टूटे

अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ