Friendship Poetry (page 64)
हरगिज़ मिरा वहशी न हुआ राम किसी का
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
हैफ़ दिल में तिरे वफ़ा न हुई
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
दिल धड़कता है कि तू यार है सौदाई का
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
बस-कि दीदार तिरा जल्वा-ए-क़ुद्दूसी है
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
आलम में अगर इश्क़ का बाज़ार न होता
अशरफ़ अली फ़ुग़ाँ
पलकों पे इंतिज़ार का मौसम सजा लिया
अशोक साहनी
रघुपति राघव राजा राम
अशोक लाल
सर्द-मेहरी से तिरी दिल जो तपाँ रखते हैं
अश्क रामपुरी
क़ैद-ए-हस्ती में हूँ अपने फ़र्ज़ की तामील तक
अश्क अमृतसरी
तीर-ए-नज़र ने आप की घाएल किया मुझे
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
सोचते हैं कि बुलबुला हो जाएँ
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
हीला है हवाला है
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
दिल मानता नहीं है मनाने के बअ'द भी
अशहद बिलाल इब्न-ए-चमन
उठाओ संग कि हम में सनक बहुत है अभी
अशफ़ाक़ अंजुम
ज़मीं पर नीम-जाँ यारी पड़ी है
अशफ़ाक़ रशीद मंसूरी
शाम ढलने से फ़क़त शाम नहीं ढलती है
अशफ़ाक़ नासिर
हिज्र इंसाँ के ख़द-ओ-ख़ाल बदल देता है
अशफ़ाक़ नासिर
याद रक्खेगा मिरा कौन फ़साना मिरे दोस्त
अशफ़ाक़ नासिर
मैं सीखता रहा इक उम्र हाव-हू करना
अशफ़ाक़ नासिर
ज़रा ज़रा ही सही आश्ना तो मैं भी हूँ
अशफ़ाक़ हुसैन
यहीं कहीं कोई आवाज़ दे रहा था मुझे
अशफ़ाक़ हुसैन
फिर याद उसे करने की फ़ुर्सत निकल आई
अशफ़ाक़ हुसैन
इक शहर ज़िया-बार यहाँ भी है वहाँ भी
अशहर हाशमी
अजनबियत थी मगर ख़ामोश इस्तिफ़्सार पर
अशहर हाशमी
सुनो कुछ दीदा-ए-नम बोलते हैं
असग़र वेलोरी
कोई छोटा यहाँ कोई बड़ा है
असग़र वेलोरी
हो गई अपनों की ज़ाहिर दुश्मनी अच्छा हुआ
असग़र वेलोरी
इक शख़्स अपने हाथ की तहरीर दे गया
असग़र राही
अपने घर में मिरी तस्वीर सजाने वाले
असग़र राही
शहर-बदर
असग़र नदीम सय्यद