Friendship Poetry (page 65)

अभी कुछ दिन लगेंगे

असग़र नदीम सय्यद

जो इस ज़मीर फ़रोशी के माहेरीन में है

असग़र मेहदी होश

इतना एहसास तो दे पालने वाले मुझ को

असग़र मेहदी होश

हमेशा तंग रहा मुझ पे ज़िंदगी का लिबास

असग़र मेहदी होश

ये आस्तान-ए-यार है सेहन-ए-हरम नहीं

असग़र गोंडवी

अल्लाह-रे चश्म-ए-यार की मोजिज़-बयानियाँ

असग़र गोंडवी

ये क्या कहा कि ग़म-ए-इश्क़ नागवार हुआ

असग़र गोंडवी

सिर्फ़ इक सोज़ तो मुझ में है मगर साज़ नहीं

असग़र गोंडवी

शिकवा न चाहिए कि तक़ाज़ा न चाहिए

असग़र गोंडवी

पास-ए-अदब में जोश-ए-तमन्ना लिए हुए

असग़र गोंडवी

मौजों का अक्स है ख़त-ए-जाम-ए-शराब में

असग़र गोंडवी

इश्वों की है न उस निगह-ए-फ़ित्ना-ज़ा की है

असग़र गोंडवी

हुस्न को वुसअतें जो दीं इश्क़ को हौसला दिया

असग़र गोंडवी

किस तरह आए तिरी बज़्म-ए-तरब में आइना

असीर लखनवी

तेरे शबाब ने किया मुझ को जुनूँ से आश्ना

असर सहबाई

सज्दे के दाग़ से न हुई आश्ना जबीं

असर सहबाई

रुमूज़-ए-मोहब्बत

असर सहबाई

लुत्फ़ गुनाह में मिला और न मज़ा सवाब में

असर सहबाई

करम पर भी होता है धोका सितम का

असर लखनवी

तस्कीन-ए-दिल को अश्क-ए-अलम क्या बहाऊँ मैं

असर लखनवी

निगह-ए-शौक़ को यूँ आइना-सामानी दे

असर लखनवी

नवेद-ए-वस्ल-ए-यार आए न आए

असर लखनवी

झपकी ज़रा जो आँख जवानी गुज़र गई

असर लखनवी

अश्क-ए-गुल-रंग निसार-ए-ग़म-ए-जानाना करें

असर लखनवी

आख़िर-ए-कार यही उज़्र जफ़ा का निकला

असर लखनवी

फ़िक्र-ए-जहान दर्द-ए-मोहब्बत फ़िराक़-ए-यार

असर अकबराबादी

कोई हमदम बना के देखो तुम

असर अकबराबादी

हम से दीवानों को असरी आगही डसती रही

असद रज़ा

हम-साई

असद जाफ़री

ख़याल यार मुझे जब लहू रुलाने लगा

असद जाफ़री