Friendship Poetry (page 67)

हर एक लम्हा-ए-ग़म बहर-ए-बे-कराँ की तरह

अरशद कमाल

ऐ दिल तिरे तुफ़ैल जो मुझ पर सितम हुए

अरशद कमाल

जीना है एक शग़्ल सो करते रहे हैं हम

अरशद काकवी

उस का अंजाम भला हो कि बुरा हो कुछ हो

अरशद जमाल हश्मी

आँखों में ख़्वाब रख दिए ता'बीर छीन ली

अरशद जमाल हश्मी

यार की फ़र्त-ए-नज़ाकत का हूँ मैं शुक्र-गुज़ार

अरशद अली ख़ान क़लक़

पूछा सबा से उस ने पता कू-ए-यार का

अरशद अली ख़ान क़लक़

जब हुआ गर्म-ए-कलाम-ए-मुख़्तसर महका दिया

अरशद अली ख़ान क़लक़

चला है छोड़ के तन्हा किधर तसव्वुर-ए-यार

अरशद अली ख़ान क़लक़

अपने बेगाने से अब मुझ को शिकायत न रही

अरशद अली ख़ान क़लक़

ये बोले जो उन को कहा बे-मुरव्वत

अरशद अली ख़ान क़लक़

यार के नर्गिस-ए-बीमार का बीमार रहा

अरशद अली ख़ान क़लक़

यगाना उन का बेगाना है बेगाना यगाना है

अरशद अली ख़ान क़लक़

वाइज़ की ज़िद से रिंदों ने रस्म-ए-जदीद की

अरशद अली ख़ान क़लक़

वा'दा-ख़िलाफ़ कितने हैं ऐ रश्क-ए-माह आप

अरशद अली ख़ान क़लक़

था क़स्द-ए-क़त्ल-ए-ग़ैर मगर मैं तलब हुआ

अरशद अली ख़ान क़लक़

तासीर जज़्ब मस्तों की हर हर ग़ज़ल में है

अरशद अली ख़ान क़लक़

सितम वो तुम ने किए भूले हम गिला दिल का

अरशद अली ख़ान क़लक़

सैर करते उसे देखा है जो बाज़ारों में

अरशद अली ख़ान क़लक़

साफ़ बातों से हो गया मा'लूम

अरशद अली ख़ान क़लक़

रोज़-ए-अव्वल से असीर ऐ दिल-ए-नाशाद हैं हम

अरशद अली ख़ान क़लक़

रग-ओ-पै में भरा है मेरे शोर उस की मोहब्बत का

अरशद अली ख़ान क़लक़

पिन्हाँ था ख़ुश-निगाहों की दीदार का मरज़

अरशद अली ख़ान क़लक़

परतव-ए-रुख़ का तिरे दिल में गुज़र रहता है

अरशद अली ख़ान क़लक़

परतव पड़ा जो आरिज़-ए-गुलगून-ए-यार का

अरशद अली ख़ान क़लक़

नहीं चमके ये हँसने में तुम्हारे दाँत अंजुम से

अरशद अली ख़ान क़लक़

न वो ख़ुशबू है गुलों में न ख़लिश ख़ारों में

अरशद अली ख़ान क़लक़

न कल तक थे वो मुँह लगाने के क़ाबिल

अरशद अली ख़ान क़लक़

लुत्फ़-ए-बहार मुश्फ़िक़-ए-मन देखते चलो

अरशद अली ख़ान क़लक़

लूटे मज़े जो हम ने तुम्हारे उगाल के

अरशद अली ख़ान क़लक़