Friendship Poetry (page 68)
लुट रही है दौलत-ए-दीदार क़ैसर-बाग़ में
अरशद अली ख़ान क़लक़
जुनूँ बरसाए पत्थर आसमाँ ने मज़रा-ए-जाँ पर
अरशद अली ख़ान क़लक़
इश्क़ में तेरे जान-ए-ज़ार हैफ़ है मुफ़्त में चली
अरशद अली ख़ान क़लक़
हुज़ूर-ए-ग़ैर तुम उश्शाक़ की तहक़ीर करते हो
अरशद अली ख़ान क़लक़
हैं तेग़-ए-नाज़-ए-यार के बिस्मिल अलग अलग
अरशद अली ख़ान क़लक़
गुलों पर साफ़ धोका हो गया रंगीं कटोरी का
अरशद अली ख़ान क़लक़
गर दिल में कर के सैर-ए-दिल-ए-दाग़-दार देख
अरशद अली ख़ान क़लक़
डोरा नहीं है सुरमे का चश्म-ए-सियाह में
अरशद अली ख़ान क़लक़
दिल में आते ही ख़ुशी साथ ही इक ग़म आया
अरशद अली ख़ान क़लक़
दाँतों से जबकि उस गुल-ए-तर के दबाए होंठ
अरशद अली ख़ान क़लक़
दफ़्तर जो गुलों के वो सनम खोल रहा है
अरशद अली ख़ान क़लक़
चश्मक-ज़नी में करती नहीं यार का लिहाज़
अरशद अली ख़ान क़लक़
बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को
अरशद अली ख़ान क़लक़
बुत-परस्ती ने किया आशिक़-ए-यज़्दाँ मुझ को
अरशद अली ख़ान क़लक़
बोलेगा कौन आशिक़-ए-नादार की तरफ़
अरशद अली ख़ान क़लक़
बे-ज़बानों को भी गोयाई सिखाना चाहिए
अरशद अली ख़ान क़लक़
बशर के फ़ैज़-ए-सोहबत से लियाक़त आ ही जाती है
अरशद अली ख़ान क़लक़
बाक़ी न हुज्जत इक दम-ए-इसबात रह गई
अरशद अली ख़ान क़लक़
अदा से देख लो जाता रहे गिला दिल का
अरशद अली ख़ान क़लक़
आश्ना होते ही उस इश्क़ ने मारा मुझ को
अरशद अली ख़ान क़लक़
आशिक़-ए-गेसू-ओ-क़द तेरे गुनहगार हैं सब
अरशद अली ख़ान क़लक़
आरिज़ में तुम्हारे क्या सफ़ा है
अरशद अली ख़ान क़लक़
आएँगे वो तो आप में हरगिज़ न आएँगे
अरशद अली ख़ान क़लक़
ग़म-ए-जहान ओ ग़म-ए-यार दो किनारे हैं
अरशद अब्दुल हमीद
मिले जो उस से तो यादों के पर निकल आए
अरशद अब्दुल हमीद
हवा-ए-हिर्स-ओ-हवस से मफ़र भी करना है
अरशद अब्दुल हमीद
चिराग़-ए-दर्द कि शम-ए-तरब पुकारती है
अरशद अब्दुल हमीद
वक़्त का झोंका जो सब पत्ते उड़ा कर ले गया
अर्श सिद्दीक़ी
ग़म की गर्मी से दिल पिघलते रहे
अर्श सिद्दीक़ी
अज़ाब-ए-बे-दिली-ए-जान-ए-मुब्तला न गया
अर्श सिद्दीक़ी