Friendship Poetry (page 59)
न फ़ासले कोई निकले न क़ुर्बतें निकलीं
अज़ीज़ हामिद मदनी
ख़त्म हुई शब-ए-वफ़ा ख़्वाब के सिलसिले गए
अज़ीज़ हामिद मदनी
हिकायत-ए-हुस्न-ए-यार लिखना हदीस-ए-मीना-ओ-जाम कहना
अज़ीज़ हामिद मदनी
हज़ार वक़्त के परतव-नज़र में होते हैं
अज़ीज़ हामिद मदनी
फ़िराक़ से भी गए हम विसाल से भी गए
अज़ीज़ हामिद मदनी
आज मुक़ाबला है सख़्त मीर-ए-सिपाह के लिए
अज़ीज़ हामिद मदनी
जैसे कोई रोता है गले प्यार से लग कर
अज़ीज़ एजाज़
निकलना ख़ुद से मुमकिन है न मुमकिन वापसी मेरी
अज़ीज़ बानो दाराब वफ़ा
घर से बाहर निकल कर
अज़ीज़ अन्सारी
मआल-ए-दोस्ती कहिए हदीस-ए-मह-वशाँ कहिए
अज़हर सईद
हलाकत-ए-दिल-ए-नाशाद राएगाँ भी नहीं
अज़हर सईद
मिलते जुलते हैं यहाँ लोग ज़रूरत के लिए
अज़हर नवाज़
उतर कर पानियों में चाँद महव-ए-रक़्स रहता है
अज़हर नक़वी
चाक-ए-दामान-ए-क़बा दाग़-ए-जुनूँ-साज़ बहुत
अज़हर नक़वी
वो माहताब अभी बाम पर नहीं आया
अज़हर इक़बाल
वो तड़प जाए इशारा कोई ऐसा देना
अज़हर इनायती
वो मेरा यार था मुझ को न ये ख़याल आया
अज़हर इनायती
जाने आया था क्यूँ मकान से मैं
अज़हर इनायती
इस हादसे को देख के आँखों में दर्द है
अज़हर इनायती
बनाए ज़ेहन परिंदों की ये क़तार मिरा
अज़हर इनायती
वफ़ा ख़ुलूस का सिंगार रोज़ करती है
अज़हर हाश्मी
कभी मधुर कभी मीठी ज़बाँ का शाइ'र हूँ
अज़हर हाश्मी
गुज़रे हुए लम्हात को अब ढूँड रहा हूँ
अज़हर हाश्मी
बस रंज की है दास्ताँ उन्वान हज़ारों
अज़हर हाश्मी
अटूट अंग
अज़हर गौरी
सब बातें ला-हासिल ठहरीं सारे ज़िक्र फ़ुज़ूल गए
अज़हर अली
हवा-ए-तेज़ के आगे कहाँ रहेगा कोई
अज़हर अब्बास
फ़ज़ा-ए-नीलगूँ का ध्यान छोड़ दे
अज़हर अब्बास
देख क़िंदील रुख़-ए-यार की जानिब मत देख
अज़हर अब्बास
वो शोख़ दिल-ओ-जाँ की तमन्ना तो न निकला
अज़ीम कुरेशी