Friendship Poetry (page 94)
निपट ये माजरा यारो कड़ा है
आबरू शाह मुबारक
निगह तेरी का इक ज़ख़्मी न तन्हा दिल हमारा है
आबरू शाह मुबारक
नाज़नीं जब ख़िराम करते हैं
आबरू शाह मुबारक
नहीं घर में फ़लक के दिल-कुशाई
आबरू शाह मुबारक
मोहब्बत सेहर है यारो अगर हासिल हो यक-रूई
आबरू शाह मुबारक
मत ग़ज़ब कर छोड़ दे ग़ुस्सा सजन
आबरू शाह मुबारक
मगर तुम सीं हुआ है आश्ना दिल
आबरू शाह मुबारक
क्यूँ मलामत इस क़दर करते हो बे-हासिल है ये
आबरू शाह मुबारक
ख़ुदा के वास्ते ऐ यार हम सीं आ मिल जा
आबरू शाह मुबारक
कनहय्या की तरह प्यारे तिरी अँखियाँ ये साँवरियाँ
आबरू शाह मुबारक
कमाँ हुआ है क़द अबरू के गोशा-गीरों का
आबरू शाह मुबारक
जलते थे तुम कूँ देख के ग़ैर अंजुमन में हम
आबरू शाह मुबारक
जाल में जिस के शौक़ आई है
आबरू शाह मुबारक
इश्क़ है इख़्तियार का दुश्मन
आबरू शाह मुबारक
इंसान है तो किब्र सीं कहता है क्यूँ अना
आबरू शाह मुबारक
हुस्न पर है ख़ूब-रूयाँ में वफ़ा की ख़ू नहीं
आबरू शाह मुबारक
हम नीं सजन सुना है उस शोख़ के दहाँ है
आबरू शाह मुबारक
हुआ हूँ दिल सेती बंदा पिया की मेहरबानी का
आबरू शाह मुबारक
है हमन का शाम कोई ले जा
आबरू शाह मुबारक
गरचे इस बुनियाद-ए-हस्ती के अनासिर चार हैं
आबरू शाह मुबारक
गली अकेली है प्यारे अँधेरी रातें हैं
आबरू शाह मुबारक
फ़जर उठ ख़्वाब सीं गुलशन में जब तुम ने मली अँखियाँ
आबरू शाह मुबारक
दुश्मन-ए-जाँ है तिश्ना-ए-ख़ूँ है
आबरू शाह मुबारक
दिल्ली के बीच हाए अकेले मरेंगे हम
आबरू शाह मुबारक
दिल नीं पकड़ी है यार की सूरत
आबरू शाह मुबारक
दिल है तिरे प्यार करने कूँ
आबरू शाह मुबारक
चंचलाहट में तू ममोला है
आबरू शाह मुबारक
आश्नाई ब-ज़ोर नहिं होती
आबरू शाह मुबारक
आज यारों को मुबारक हो कि सुब्ह-ए-ईद है
आबरू शाह मुबारक
वसवसे दिल में न रख ख़ौफ़-ए-रसन ले के न चल
अबरार किरतपुरी