Hope Poetry (page 80)
अश्गाबाद की शाम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ऐ दिल-ए-बेताब ठहर
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
आरज़ू
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
आख़िरी ख़त
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
यूँ बहार आई है इस बार कि जैसे क़ासिद
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
ये जफ़ा-ए-ग़म का चारा वो नजात-ए-दिल का आलम
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
याद-ए-ग़ज़ाल-चश्माँ ज़िक्र-ए-समन-अज़ाराँ
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
याद का फिर कोई दरवाज़ा खुला आख़िर-ए-शब
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वो बुतों ने डाले हैं वसवसे कि दिलों से ख़ौफ़-ए-ख़ुदा गया
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वो अहद-ए-ग़म की काहिश-हा-ए-बे-हासिल को क्या समझे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
वफ़ा-ए-वादा नहीं वादा-ए-दिगर भी नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तुम आए हो न शब-ए-इंतिज़ार गुज़री है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
तिरी उमीद तिरा इंतिज़ार जब से है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
शरह-ए-फ़िराक़ मदह-ए-लब-ए-मुश्कबू करें
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
सब क़त्ल हो के तेरे मुक़ाबिल से आए हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
रह-ए-ख़िज़ाँ में तलाश-ए-बहार करते रहे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फिर हरीफ़-ए-बहार हो बैठे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
फिर आईना-ए-आलम शायद कि निखर जाए
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
नहीं निगाह में मंज़िल तो जुस्तुजू ही सही
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
न किसी पे ज़ख़्म अयाँ कोई न किसी को फ़िक्र रफ़ू की है
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किए आरज़ू से पैमाँ जो मआल तक न पहुँचे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किसी गुमाँ पे तवक़्क़ो' ज़ियादा रखते हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
किस शहर न शोहरा हुआ नादानी-ए-दिल का
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कभी कभी याद में उभरते हैं नक़्श-ए-माज़ी मिटे मिटे से
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
कब तक दिल की ख़ैर मनाएँ कब तक रह दिखलाओगे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
जमेगी कैसे बिसात-ए-याराँ कि शीशा ओ जाम बुझ गए हैं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
इश्क़ मिन्नत-कश-ए-क़रार नहीं
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हुस्न मरहून-ए-जोश-ए-बादा-ए-नाज़
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम ने सब शेर में सँवारे थे
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़
हम सादा ही ऐसे थे की यूँ ही पज़ीराई
फ़ैज़ अहमद फ़ैज़