Hope Poetry (page 81)

हम मुसाफ़िर यूँही मसरूफ़-ए-सफ़र जाएँगे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हसरत-ए-दीद में गुज़राँ हैं ज़माने कब से

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हर हक़ीक़त मजाज़ हो जाए

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हमीं से अपनी नवा हम-कलाम होती रही

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

हैराँ है जबीं आज किधर सज्दा रवा है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

फ़िक्र-ए-दिलदारी-ए-गुलज़ार करूँ या न करूँ

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

दोनों जहान तेरी मोहब्बत में हार के

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

चश्म-ए-मयगूँ ज़रा इधर कर दे

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

अब वही हर्फ़-ए-जुनूँ सब की ज़बाँ ठहरी है

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

''आप की याद आती रही रात भर''

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

आज यूँ मौज-दर-मौज ग़म थम गया इस तरह ग़म-ज़दों को क़रार आ गया

फ़ैज़ अहमद फ़ैज़

उन लबों की याद आई गुल के मुस्कुराने से

फ़य्याज़ अहमद

हिमाला की दासियाँ

फ़ैसल सईद फ़ैसल

और तो कुछ नहीं किया होगा

फ़ैसल फेहमी

अदावतों में जो ख़ल्क़-ए-ख़ुदा लगी हुई है

फ़ैसल अजमी

ये भी नहीं कि दस्त-ए-दुआ तक नहीं गया

फ़ैसल अजमी

शामियानों की वज़ाहत तो नहीं की गई है

फ़ैसल अजमी

मुझ को ये फ़िक्र कब है कि साया कहाँ गया

फ़ैसल अजमी

मैं ज़ख़्म खा के गिरा था कि थाम उस ने लिया

फ़ैसल अजमी

मैं ग़ार में था और हवा के बग़ैर था

फ़ैसल अजमी

किसी ने कैसे ख़ज़ाने में रख लिया है मुझे

फ़ैसल अजमी

हर शख़्स परेशान है घबराया हुआ है

फ़ैसल अजमी

अदावतों में जो ख़ल्क़-ए-ख़ुदा लगी हुई है

फ़ैसल अजमी

तफ़्सील मसाफ़त की

फ़हमीदा रियाज़

पूर्वांचल

फ़हमीदा रियाज़

नज़्र-ए-फ़िराक़

फ़हमीदा रियाज़

मुक़ाबला-ए-हुस्न

फ़हमीदा रियाज़

इस गली के मोड़ पर

फ़हमीदा रियाज़

इंक़िलाबी औरत

फ़हमीदा रियाज़

एक ज़न-ए-ख़ाना-ब-दोश

फ़हमीदा रियाज़