Hope Poetry (page 215)

वहाँ शायद कोई बैठा हुआ है

आदिल रज़ा मंसूरी

रास्ते सिखाते हैं किस से क्या अलग रखना

आदिल रज़ा मंसूरी

आँधियाँ ग़म की चलीं और कर्ब-बादल छा गए

अाबिदा उरूज

गुज़रे जो अपने यारों की सोहबत में चार दिन

ए जी जोश