Hope Poetry (page 83)

सजन मुझ पर बहुत ना-मेहरबाँ है

फ़ाएज़ देहलवी

मुस्तमिन्दाँ को सताया न करो

फ़ाएज़ देहलवी

ख़ूबाँ के बीच जानाँ मुम्ताज़ है सरापा

फ़ाएज़ देहलवी

जब सजीले ख़िराम करते हैं

फ़ाएज़ देहलवी

गुल तिरे मुख की फ़िक्र में बीमार

फ़ाएज़ देहलवी

धूप सा यू कपूल नारी है

फ़ाएज़ देहलवी

इन उजड़ी बस्तियों का कोई तो निशाँ रहे

एज़ाज़ अहमद आज़र

दरख़्त-ए-जाँ पर अज़ाब-रुत थी न बर्ग जागे न फूल आए

एज़ाज़ अहमद आज़र

उजाले तेल छिड़कने लगे उजालों पर

एज़ाज़ अफ़ज़ल

लहू ने क्या तिरे ख़ंजर को दिलकशी दी है

एज़ाज़ अफ़ज़ल

जाम खनके तो सँभाला न गया दिल तुम से

एज़ाज़ अफ़ज़ल

हम ने मयख़ाने की तक़्दीस बचा ली होती

एज़ाज़ अफ़ज़ल

चलो कुछ तो राह तय हो न चले तो भूल होगी

एज़ाज़ अफ़ज़ल

उजाले तेल छिड़कने लगे उजालों पर

एज़ाज़ अफ़ज़ल

अब सराब के चश्मे मौजज़न नहीं होते

एज़ाज़ अफ़ज़ल

हिफ़ाज़त

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

ज़ीस्त में ग़म हैं हम-सफ़र फिर भी

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

ख़ुशी की मिली ये सज़ा रफ़्ता रफ़्ता

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

जग में आता है हर बशर तन्हा

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

है नहीं कोई नाख़ुदा दिल का

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

डूबने वाले को तिनके का सहारा है बहुत

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

दामन तेरा मुझ से छूटा मिलने के हालात नहीं

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

ऐ ग़म-ए-दिल ये माजरा क्या है

एलिज़ाबेथ कुरियन मोना

चढ़ते सूरज की मुदारात से पहले 'एजाज़'

एजाज़ वारसी

राह-ए-तलब में अहल-ए-दिल जब हद-ए-आम से बढ़े

एजाज़ वारसी

मय-ख़ाना है बिना-ए-शर-ओ-ख़ैर तो नहीं

एजाज़ वारसी

कार-ए-ख़ैर इतना तो ऐ लग़्ज़िश-ए-पा हो जाता

एजाज़ वारसी

जिस को देखो बेवफ़ा है आइनों के शहर में

एजाज़ वारसी

मिल सकेगी अब भी दाद-ए-आबला-पाई तो क्या

एजाज़ सिद्दीक़ी

दुनिया सबब-ए-शोरिश-ए-ग़म पूछ रही है

एजाज़ सिद्दीक़ी