Hope Poetry (page 84)

साए में आबलों की जलन और बढ़ गई

एजाज़ रहमानी

रंग मौसम के साथ लाए हैं

एजाज़ रहमानी

ख़ुश्क दरिया पड़ा है ख़्वाहिश का

एजाज़ रहमानी

हवा के वास्ते इक काम छोड़ आया हूँ

एजाज़ रहमानी

सवाल सवाल सियाह कश्कोल

एजाज़ रही

थीं इक सुकूत से ज़ाहिर मोहब्बतें अपनी

एजाज़ उबैद

कोई हो चेहरा शनासा दिखाई देता है

एजाज़ उबैद

किस से मिलने जाओ अब किस से मुलाक़ातें करो

एजाज़ उबैद

दूसरों की आँख ले कर भी पशेमानी हुई

एजाज़ उबैद

ऐसे ही दिन थे कुछ ऐसी शाम थी

एजाज़ उबैद

अभी तमाम आइनों में ज़र्रा ज़र्रा आब है

एजाज़ उबैद

दिनों महीनों आँखें रोईं नई रुतों की ख़्वाहिश में

एजाज़ गुल

दुश्मनों के दरमियान सुल्ह

एजाज़ गुल

यहीं था बैठा हुआ दरमियाँ कहाँ गया मैं

एजाज़ गुल

क़ाफ़िला उतरा सहरा में और पेश वही मंज़र आए

एजाज़ गुल

फैला अजब ग़ुबार है आईना-गाह में

एजाज़ गुल

पेचाक-ए-उम्र अपने सँवार आइने के साथ

एजाज़ गुल

मंज़र-ए-वक़्त की यकसानी में बैठा हुआ हूँ

एजाज़ गुल

महमिल है मतलूब न लैला माँगता है

एजाज़ गुल

किसे ख़याल था ऐसी भी साअ'तें होंगी

एजाज़ गुल

ख़ाशाक से ख़िज़ाँ में रहा नाम बाग़ का

एजाज़ गुल

जो क़िस्सा-गो ने सुनाया वही सुना गया है

एजाज़ गुल

इतना तिलिस्म याद के चक़माक़ में रहा

एजाज़ गुल

इस्तादा है जब सामने दीवार कहूँ क्या

एजाज़ गुल

गलियों में भटकना रह-ए-आलाम में रहना

एजाज़ गुल

दर खोल के देखूँ ज़रा इदराक से बाहर

एजाज़ गुल

चल रहा हूँ पेश-ओ-पस-मंज़र से उकताया हुआ

एजाज़ गुल

तकमील

एजाज़ फ़ारूक़ी

हर्फ़

एजाज़ फ़ारूक़ी

फूलों से होगी धूल जुदा देखते रहो

एजाज़ अासिफ़